
उज्जैन। महाकाल नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन से सीधे महाकाल लोक तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी रोप-वे परियोजना एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंच गई है। करीब 199 करोड़ रुपए का पुराना ठेका निरस्त होने के बाद अब परियोजना के लिए नए सिरे से कंपनी का चयन और निविदा प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है।
नए प्रस्ताव के मुताबिक 258.37 करोड़ रुपए की लागत से बीओटी मॉडल पर रोप-वे का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए मई 2028 तक काम पूरा करने का लक्ष्य सामने आया है। हालांकि, जिस परियोजना को श्रद्धालुओं की सुविधा और शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी सौगात बताया गया था, उसके निर्माण की शुरुआत ही अब तक नहीं हो पाई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुरानी कंपनी का ठेका निरस्त हो चुका है तो नई कंपनी के चयन, निविदा, स्वीकृति और निर्माण प्रक्रिया में कितना समय लगेगा? यदि मई 2028 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य है तो निर्माण कार्य समय पर शुरू करना भी बड़ी चुनौती होगी। सिंहस्थ में देश-दुनिया से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए शहर को बेहतर परिवहन सुविधाओं की जरूरत है। ऐसे में रोप-वे जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में देरी का असर भविष्य की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अब शहरवासी यह जानना चाहते हैं कि रेलवे स्टेशन से महाकाल लोक तक रोप-वे का सपना वास्तव में जमीन पर उतरेगा या फिर यह परियोजना भी घोषणाओं, स्वीकृतियों और नई निविदाओं के बीच उलझकर रह जाएगी। फिलहाल पुराना ठेका निरस्त होने के बाद नई कंपनी के चयन की प्रक्रिया पर ही इस परियोजना का अगला भविष्य टिका हुआ है।
5 मिनट में दूरी पूरी करने का दावा-स्टेशन से लेकर इंदौर गेट तक खुदाई
केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा के बाद इस परियोजना को लेकर उम्मीद जगी थी कि रेलवे स्टेशन से महाकाल मंदिर तक का सफर कुछ ही मिनटों में पूरा हो सकेगा। दावा किया गया था कि रोप-वे के माध्यम से श्रद्धालु लगभग पांच मिनट में मंदिर क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए भी इसे शहर की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा था। लेकिन परियोजना की शुरुआत से ही कभी रेलवे की स्वीकृति, कभी राज्य सरकार और कभी केंद्र स्तर की प्रक्रियाओं के कारण मामला आगे बढऩे के बजाय अलग-अलग स्तरों पर उलझता रहा। इस बीच रेलवे स्टेशन से इंदौर गेट के बीच प्रस्तावित रोप-वे के लिए कुछ स्थानों पर खुदाई की जा चुकी है। निर्माण क्षेत्र के आसपास लोहे की चादरें लगाकर रास्ते को घेरा गया है। दूसरी तरफ इसी क्षेत्र में एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण भी प्रस्तावित है और उसके लिए भी गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में स्थानीय नागरिकों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो रही है। एक ओर निर्माण कार्यों के कारण रास्तों पर बाधाएं हैं, वहीं दूसरी ओर रोप-वे का भविष्य ही स्पष्ट नहीं है।
