
तिरुवनंतपुरम, 03 नवंबर (वार्ता) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सार्वजनिक धन के एक-एक रुपये का हिसाब सुनिश्चित करने, सरकारी खर्च में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने तथा वर्षों से लंबित लेखा परीक्षा टिप्पणियों का समयबद्ध निस्तारण करने का आह्वान किया है। श्री बिरला ने केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम में संसद और राज्य विधानमंडलों की लोक लेखा समितियों के सभापतियों के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए जिसके लिए उसे स्वीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी खर्च की वास्तविक कसौटी यह होनी चाहिए कि उससे आम नागरिकों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोक लेखा समितियां केवल सरकारी लेखा-जोखा और लेखा परीक्षा रिपोर्टों की जांच तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि यह भी आकलन होना चाहिए कि स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों के लिए हुआ है या नहीं। उन्होंने कहा कि वित्तीय शुचिता और राष्ट्रीय कल्याण के साझा लक्ष्य के सामने राजनीतिक मतभेद गौण होने चाहिए तथा समितियों को संवाद, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।
श्री बिरला ने लेखा परीक्षा संबंधी टिप्पणियों के 10, 15 और यहां तक कि 20 वर्षों तक लंबित रहने पर चिंता जताते हुए इनके निस्तारण के लिए ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की जरूरत बतायी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को निगरानी, समीक्षा और अनुवर्ती कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, ताकि वित्तीय अनियमितताओं और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोका जा सके।
उन्होंने लोक लेखा समितियों से वित्तीय निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), आंकड़ों का विश्लेषण और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक व्यय का आकलन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि आधारभूत ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता और जनकल्याणकारी योजनाओं के वास्तविक प्रभाव की भी जांच की जानी चाहिए।
लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के. सी. वेणुगोपाल ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वित्तीय जांच का केंद्र बिंदु परिणाम होने चाहिए ताकि सार्वजनिक धन का विवेकपूर्ण उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि संसद के प्रत्येक सत्र के दौरान समिति की कम से कम एक रिपोर्ट और उस पर सरकार की कार्रवाई को लेकर चर्चा होनी चाहिए।
श्री वेणुगोपाल ने लेखा परीक्षा टिप्पणियों पर समयबद्ध कार्रवाई, विभागों की ओर से समय पर जवाब और प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं तथा बड़ी आधारभूत ढांचा परियोजनाओं की गहन जांच की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि समिति की सिफारिशों पर ठोस कार्रवाई और निरंतर निगरानी से सार्वजनिक धन के जिम्मेदार उपयोग तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को मजबूत किया जा सकता है।
