चक्रवात ‘अर्णब’ के नुकसान का आकलन करने ओडिशा पहुंची केंद्रीय टीम, एक और तूफान के खतरे को लेकर राज्य हाई अलर्ट पर

भुवनेश्वर, 02 नवंबर (वार्ता) चक्रवात और बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति सामान्य करने के प्रयासों के बीच केंद्र सरकार की एक टीम चक्रवात ‘अर्णब’ और उसके बाद हुई मूसलाधार बारिश से हुए नुकसान का जायजा लेने ओडिशा पहुंच गयी है। वहीं बंगाल की खाड़ी में बने एक और चक्रवातीय प्रणाली के संभावित प्रभाव से राज्य प्रशासन निपटने की तैयारी कर रहा है।

ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने सोमवार यहां राजीव भवन स्थित विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) कार्यालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्हाेंने बताया कि केंद्रीय टीम सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल गंजाम और गजपति जिलों का दौरा कर नुकसान का आकलन करेगी और स्थिति की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने पूरे आपदा प्रबंधन तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है और प्रभावित जिलों में राहत, बचाव तथा बहाली कार्यों को तेज कर दिया है। इसके साथ ही एक और चक्रवातीय तूफान से पैदा होने वाले संभावित खतरे से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

जान-माल की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए श्री पुजारी ने कहा कि प्रशासन किसी भी स्थिति और उसके बाद के हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। आगामी चक्रवातीय तंत्र का राज्य पर सीमित प्रभाव पड़ने की उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार मौसम की बदलती स्थिति पर पैनी नजर रख रही है। उन्होंने यह भी उम्मीद जतायी कि भगवान जगन्नाथ की कृपा से राज्य को कम से कम नुकसान होगा। उन्होंने लोगों से न घबराने, सतर्क रहने और अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की।

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार पाढ़ी और विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल शामिल हुए।बैठक में चक्रवात ‘अर्णब’ व उसके बाद आयी बाढ़ के प्रभाव, जारी राहत एवं बहाली कार्यों की प्रगति और एक और संभावित चक्रवातीय तूफान से निपटने के लिए राज्य की तैयारियों की समीक्षा की गयी।

बैठक में प्रस्तुत आकलन के अनुसार, आने वाला चक्रवातीय तंत्र ‘मुरासू’ बंगाल की खाड़ी के ऊपर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदल गया है। यह तंत्र नेल्लोर से लगभग 160 किलोमीटर, चेन्नई और कावली से 180 किलोमीटर, ओंगोल से 210 किलोमीटर और मछलीपट्टनम से 240 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था।तट से टकराने के समय हवा की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। गंजाम, गजपति, कोरापुट, रायगढ़, मलकानगिरी, कंधमाल, कालाहांडी और पुरी सहित ओडिशा के कई जिले इस मौसम प्रणाली से प्रभावित हो सकते हैं।

राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और उसने संबंधित विभागों तथा जिला प्रशासनों को किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।

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