नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के भीतर शाहदरा विवाद को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। पहले इस मामले में वकीलों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोला और अब ACP और SHO अपने ही विभाग के फैसले के विरोध में पुलिस मुख्यालय पहुंच गए। दोनों अधिकारियों के तबादले के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब पुलिस विभाग के अंदरूनी टकराव के रूप में सामने आ रहा है।
मामले की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा में पार्किंग को लेकर एक वकील और पुलिस कॉन्स्टेबल के बीच हुए विवाद से हुई थी। इसके दो दिन बाद 25 अक्टूबर को बड़ी संख्या में वकील शाहदरा थाने पहुंचे और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करने लगे। इसी दौरान पुलिस और वकीलों के बीच तनाव बढ़ गया। आरोप है कि वकीलों के साथ मारपीट की गई और लाठीचार्ज के दौरान वकील ललित बंसल के सिर में चोट आई। इसके बाद वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
वकीलों ने इस पूरे मामले में ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO के खिलाफ कार्रवाई के साथ उनके तबादले की मांग उठाई। मामले को लेकर अदालत का भी रुख किया गया। आखिरकार पुलिस विभाग ने दोनों अधिकारियों का तबादला कर दिया।
*तबादले के बाद पुलिस मुख्यालय पहुंचे अधिकारी*
तबादले के फैसले से नाराज ACP और SHO दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंच गए। दोनों अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने की कोशिश की। ACP मनस्वी वशिष्ठ ने आरोप लगाया कि पुलिस कमिश्नर ने दबाव में आकर उनका तबादला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कमिश्नर ने उनसे मुलाकात नहीं की।
इसके बाद दोनों अधिकारी मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। ACP ने पुलिस कमिश्नर से दोबारा मिलने की कोशिश की। अब इस पूरे घटनाक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका और आगे होने वाली बातचीत पर सबकी नजर है।
*एक विवाद, दो तरफ विरोध*
शाहदरा में पार्किंग से शुरू हुआ विवाद अब दो स्तरों पर विरोध की वजह बन गया है। एक तरफ वकील पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस अधिकारी तबादले के फैसले पर आपत्ति जता रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने दिल्ली पुलिस के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि पुलिस नेतृत्व दोनों पक्षों की शिकायतों पर किस तरह कार्रवाई करता है और इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है।
