करोड़ों खर्च के बाद भी सुरक्षित नहीं सफाईकर्मी

ग्वालियर:शहर को स्वच्छ रखने के लिए बनाए गए सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कर्मचारियों के लिए मौत का जाल बनते जा रहे हैं। सफाई के लिए जेटिंग और सुपर सकर जैसी मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों को जहरीली गैस से भरे टैंकों और चैंबरों में उतरना पड़ रहा है। एक कर्मचारी बेहोश होता है तो उसे बचाने दूसरा अंदर पहुंच जाता है। नतीजा यह कि सफाई के लिए शुरू हुआ काम कई परिवारों के लिए मातम में बदल जाता है।

उज्जैन में देवास रोड स्थित होटल के वेस्टेज चैंबर की सफाई के दौरान चार लोगों की मौत ने एक बार फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, चैंबर में सफाई के दौरान जहरीली गैस और दम घुटने से कर्मचारी बाहर नहीं निकल सके। उन्हें बचाने की कोशिश में अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ गए। दो लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। यह हादसा केवल उज्जैन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के उन सभी शहरों के लिए चेतावनी है, जहां आज भी जोखिम उठाकर सफाई कराई जा रही है।

ग्वालियर में भी हो चुकी दो हादसों में चार मौतें :
ग्वालियर में भी इस तरह के हादसों का इतिहास पुराना है। फरवरी 2006 में माधवगंज की गदवे की गोठ में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दो कर्मचारियों की जान चली गई थी। इसके बाद जून 2023 में सिल्क मिल क्षेत्र में सीवर लाइन की सफाई के दौरान नगर निगम के संविदा कर्मचारी अमन और विक्रम की दम घुटने से मौत हो गई। दोनों घटनाओं के बीच करीब 17 साल का अंतर रहा, लेकिन हादसों का तरीका नहीं बदला। सवाल यह है कि इतने वर्षों में तकनीक और नियमों के बावजूद सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं हो सकी?
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प्रदेश में कहां-कब गई जान :
मध्यप्रदेश में सामने आई प्रमुख घटनाओं के उपलब्ध विवरण के अनुसार, ग्वालियर में वर्ष 2006 में सेप्टिक टैंक की जहरीली गैस से 2, वर्ष 2023 में सीवर सफाई के दौरान दम घुटने से 2, सतना में वर्ष 2025 में सीवर सफाई हादसे में 1, उज्जैन में जुलाई 2026 में सीवर सफाई के दौरान 1 और नवंबर 2026 में होटल के फूड वेस्ट चैंबर में दम घुटने से 4 लोगों की मौत हुई। इस तरह इन पांच घटनाओं में कुल 10 मौतें सामने आई हैं। इसके अलावा लोकसभा में 4 अगस्त 2026 को दिए गए सरकारी जवाब के मुताबिक, 1 जनवरी 2021 से 30 जून 2026 के बीच मध्यप्रदेश में सीवर और सेप्टिक टैंक की जोखिमपूर्ण सफाई के दौरान 13 मौतें दर्ज की गईं, जबकि देशभर में यह संख्या 332 रही।

जहरीली गैस बनती है मौत का जाल :
सेप्टिक टैंक और सीवर चैंबर में जैविक कचरे के सड़ने से हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी खतरनाक गैसें बन सकती हैं। बंद जगह में ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति कुछ ही समय में बेहोश हो सकता है। सबसे गंभीर बात यह है कि गैस की मौजूदगी का अंदाजा केवल गंध से नहीं लगाया जा सकता।
किसी कर्मचारी के अंदर बेहोश होने पर उसे बचाने के लिए दूसरा व्यक्ति भी बिना सुरक्षा अंदर उतर जाता है और खुद हादसे का शिकार हो जाता है। गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन की जांच, उचित श्वसन उपकरण और प्रशिक्षित बचाव दल के बिना टैंक में प्रवेश जानलेवा हो सकता है।

इन्होंने क्या कहा?
सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान हो रही मौतें व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। जब मशीनें उपलब्ध हैं तो मजदूरों को जहरीले टैंकों में क्यों उतारा जा रहा है उज्जैन की घटना के बाद जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
– सतेन्द्र विद्रोही , प्रदेश अध्यक्ष आसपा
सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता जरूरी है। जब आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं तो मजदूरों को जहरीले टैंकों में क्यों उतारा जा रहा है ग्वालियर में भी ऐसे हादसों में जानें जा चुकी हैं, लेकिन व्यवस्था में बदलाव नहीं दिख रहा। हादसों के बाद मुआवजे के बजाय पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए।
– राहुल, जागरूक नागरिक ग्वा.

सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई आधुनिक मशीनों के माध्यम से कराई जाती है। निगम के पास इसके लिए पर्याप्त मशीनें उपलब्ध हैं। टैंकों में जहरीली गैस बनने से दम घुटने का खतरा रहता है, जो कई बार जानलेवा साबित होता है। इसलिए सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी है।
— प्रदीप सिंह तोमर, अपर आयुक्त, नगर निगम ग्वालियर

मशीनों पर करोड़ों खर्च, फिर भी जान जोखिम में
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* अप्रैल 2026 में सुपर सकर मशीन से ग्वालियर क्षेत्र में सीवर सफाई अभियान शुरू किया गया।
* दिसंबर 2025 में दो अतिरिक्त सुपर सकर मशीनों की खरीद की निविदा जारी हुई, जिसे 1 सितंबर 2026 को स्वीकृति मिली।
* 22 डी-सिल्टिंग मशीनों की खरीद के लिए करीब 3.76 करोड़ रुपये का टेंडर सामने आया।
* चार ट्रक माउंटेड सक्शन कम जेटिंग मशीनों की खरीद के लिए करीब 2.55 करोड़ रुपये का टेंडर जारी हुआ।
* 18 सितंबर को निगमायुक्त ने तीन तरह की मशीनों का प्रदर्शन देखा और गलियों की चौड़ाई के हिसाब से मशीनों की जरूरत तय करने के निर्देश दिए।

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