अटलांटा, 01 नवंबर (वार्ता) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रहा है और पड़ोसी देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को खतरे में डाल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।
श्री रुबियो ने कहा कि ईरान ने असैन्य वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को अपनी राजकीय नीति का हिस्सा बना लिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक स्थिति पैदा हो गई है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि निशाना बनाए जा रहे जहाजों पर तेल और प्राकृतिक गैस सहित वाणिज्यिक माल लदा होता है, न कि सैन्य या नौसैनिक सामग्री। अटलांटा में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में श्री रुबियो ने कहा, “अब हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जहां ईरानी शासन सक्रिय रूप से और खुलेआम वाणिज्यिक जहाजों को हमलों का निशाना बना रहा है। हम ऐसे जहाजों की बात कर रहे हैं जिन पर तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य माल लदा है और ईरान कह रहा है कि वह उन्हें डुबोने की कोशिश करेगा।”
उन्होंने कहा, “वे खुलेआम जहाजों पर हमले को राजनयिक और रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं।”
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिकी सेना लगभग हर रात ईरानी ड्रोन और मिसाइलों से वाणिज्यिक जहाजों की रक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि अब हमले केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बाब अल-मंदेब में भी देखे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले ईंधन की मात्रा अब संघर्ष से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई है लेकिन इस प्रवाह को बनाए रखने के लिए अमेरिका को लगातार सैन्य सुरक्षा देनी पड़ रही है।
श्री रुबियो ने चेतावनी दी कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में व्यवधान का असर ऊर्जा बाजारों से कहीं ज्यादा पड़ रहा है। इससे ईंधन, उर्वरक और कृषि उत्पादों की आवाजाही बाधित हो रही है, जो खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा है।
उन्होंने कहा, “जब ऊर्जा, उर्वरक और कृषि उत्पाद अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते, तो इससे हमारे प्रत्येक देश की सबसे बुनियादी जरूरत खतरे में पड़ जाती है।”
ईरान पर अमेरिका के नए सैन्य हमलों की संभावना के बारे में पूछे जाने पर श्री रुबियो ने किसी योजना का खुलासा करने से इनकार किया लेकिन स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्णय लेने पर अमेरिका के पास कार्रवाई करने की सैन्य क्षमता मौजूद है।
उन्होंने कहा, “दुनिया में किसी भी चुनौती से निपटने के मामले में राष्ट्रपति की प्राथमिकता, यदि संभव हो, तो कूटनीतिक और शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने की होती है।” उन्होंने कहा कि श्री ट्रंप ने नए सैन्य अभियान को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं लिया है।
श्री रुबियो ने चेतावनी दी कि किसी भी कूटनीतिक समझौते में अमेरिका की प्रमुख सुरक्षा चिंताओं का समाधान होना चाहिए, विशेषकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व को अस्थिर करने में उसकी कथित भूमिका का। उन्होंने कहा, “समझौता ऐसा नहीं हो सकता जो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाले या हमारी प्रमुख चिंताओं का समाधान न करे।”
श्री रुबियो ने कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को साकार नहीं होने दिया जा सकता। उन्होंने ईरान को क्षेत्र में अस्थिरता का प्रमुख केंद्र बताया। उन्होंने ईरान पर लेबनान, यमन और इराक में सशस्त्र समूहों तथा उग्रवादी संगठनों को समर्थन देने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, ईरान के समर्थन से हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमता बढ़ी है और वे सऊदी अरब के लिए खतरा बन गए हैं।
ईरान के सामूहिक विनाश के हथियार हासिल करने की आशंका पर श्री रुबियो ने गंभीर परिणामों की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हो। कल्पना कीजिए कि उसके पास किसी भी तरह के सामूहिक विनाशक हथियार हों, चाहे वे रासायनिक, जैविक या परमाणु हों।”
उन्होंने कहा, “तब वह अपने पड़ोसियों को किस तरह की धमकी देगा? तब वह पाइपलाइन उड़ाने की धमकी नहीं देगा, बल्कि हजारों नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जान लेने की धमकी देगा।”
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित खाड़ी देशों को सुरक्षा गारंटी देने के सवाल पर श्री रुबियो ने कहा कि अमेरिका पहले से ही जहाजों को सैन्य सुरक्षा प्रदान कर रहा है और क्षेत्रीय वायु रक्षा प्रणालियों को समर्थन दे रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका खाड़ी देशों के सामने मौजूदा जोखिमों को समझता है। इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले ऊर्जा निर्यात पर निर्भर हैं।
श्री रुबियो ने कहा, “अमेरिका अभी वहां उनकी सुरक्षा कर रहा है।” उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति ले जा रहे जहाजों की ओर दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को नियमित रूप से रोक रही है।
सऊदी अरब के लिए हूती खतरे के बारे में श्री रुबियो ने कहा कि अमेरिका यूएई के साथ किए गए रक्षा सहयोग संबंधी वादों को पूरा करेगा। हालांकि, आक्रामक सैन्य अभियानों में भाग लेने का कोई भी निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में होगा।
उन्होंने कहा, “हमारा सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग समझौता है और रक्षा संबंधी सहमतियां हैं। हम इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करते रहेंगे।”

