वाशिंगटन, 31 अक्टूबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने की कोई जल्दबाजी में नहीं है। उन्होंने इस संघर्ष को ‘सामान्य युद्ध नहीं’ बताते हुए दावा किया कि महीनों से जारी सैन्य टकराव और स्थायी समाधान के लिए बार-बार हो रहे कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद समय अमेरिका के पक्ष में है।
श्री ट्रंप ने यह भी दावा किया कि तेहरान अब भी बातचीत करना चाहता है, लेकिन वह गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है और उसके पास सैन्यकर्मियों तथा कानून प्रवर्तन अधिकारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं।
श्री ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, “बातचीत चल रही है। वे बात करना चाहते हैं। वे लगातार बातचीत कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “लेकिन देखिए, वे अपने सैनिकों को वेतन नहीं दे रहे हैं, वे अपने पुलिसकर्मियों को भी भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। वे बड़ी मुश्किल में हैं। और सच कहूं तो हमारे पास समय है। यह युद्ध है, लेकिन सामान्य युद्ध नहीं है। हमें इसमें सात महीने हो चुके हैं।”
श्री ट्रंप ने अभियान की आर्थिक लागत को भी कमतर बताते हुए दावा किया कि इस संघर्ष पर वाशिंगटन अपेक्षाकृत बहुत कम खर्च कर रहा है।
श्री ट्रंप ने कहा, “तुलनात्मक रूप से हम बहुत कम पैसा खर्च कर रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला से जुड़े घटनाक्रमों के जरिए अमेरिका अपने खर्च की कई गुना भरपाई कर चुका है।
श्री ट्रंप की ये टिप्पणियां ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने या तेज करने की उनकी बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद आई हैं। उन्होंने पहले चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ शुरुआती अमेरिकी सैन्य अभियान ‘एपिक फ्यूरी’ का जिक्र करते हुए ‘एक और छोटा एपिक फ्यूरी’ शुरू करने की संभावना जताई थी। हालांकि, उन्होंने एक ‘बड़े और अच्छे’ समझौते की उम्मीद भी व्यक्त की थी।
अमेरिका और ईरान के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी सहित कई अहम मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। कूटनीतिक गतिविधियों में शुक्रवार को तेजी आई, जब तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने अमेरिका में जी-20 मंत्रिस्तरीय बैठक से इतर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की।
इस बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत, व्यापक क्षेत्रीय घटनाक्रम और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई।
यह मुलाकात सप्ताह की शुरुआत में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और श्री ट्रंप के बीच हुई फोन वार्ता के बाद हुई। उस बातचीत में अंकारा ने समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं और क्षेत्रीय तनाव कम करने के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया था।
यह युद्ध 28 फरवरी को ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल प्रतिष्ठानों और परमाणु बुनियादी ढांचे पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ था। शुरुआती हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमले किए थे।
इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।

