सतना :अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने का ऐतिहासिक निर्णय आज आत्मनिर्भर भारत की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। इसी कड़ी में स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित विक्रम-1 रॉकेट देश की उभरती तकनीकी शक्ति और आत्मनिर्भरता के संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा है। हाल ही में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से मिशन ‘आगमन’ के अंतर्गत निजी क्षेत्र के प्रथम ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण किया गया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि में सतना जिले के युवा इंजीनियर रत्नेंद्र सिंह ने महत्वपूर्ण योगदान देकर न केवल जिले, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। सतना जिले के ग्राम कोठरा (जैतवारा) निवासी रत्नेंद्र सिंह वर्तमान में स्काईरूट एयरोस्पेस, हैदराबाद में इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। उनके पिता पुष्पेंद्र सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं, माता श्रीमती रीतू सिंह गृहिणी हैं तथा उनकी बहन शिल्पा सिंह गुड़गांव में आईटी इंजीनियर हैं। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे उच्च तकनीकी क्षेत्र में योगदान देना उनकी मेहनत, लगन और प्रतिभा का परिचायक है।
कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने रत्नेंद्र सिंह की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि सतना जिले के युवाओं की प्रतिभा आज राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रही है। यह उपलब्धि जिले के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। कलेक्टर ने विश्वास व्यक्त किया कि रत्नेंद्र सिंह की सफलता युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और देश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाती हैं। भारत आज विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। विक्रम-1 रॉकेट की सफलता और उसमें सतना के युवा का योगदान इस बात का प्रमाण है कि देश की नई पीढ़ी नवाचार और तकनीकी विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही है। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने रत्नेंद्र सिंह के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।
