
शिवपुरी। नरवर के किले से रणथंभौर-कूनो-ओरछा-खजुराहो के लिए पर्यटन का सर्किट बनेगा। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस संबंध में पत्र लिखा है। नरवर का किला देश के संभवत: देश के सबसे प्राचीन किलो मे एक है। यह किला सनातन संस्कृति की पहचान भी माना जाता है।
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संदीप माहेश्वरी और नगर परिषद अध्यक्ष पद्मा माहेश्वरी द्वारा उठाई गई मांगों पर सिंधिया ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी और प्रदेश की पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री को अर्धशासकीय पत्र भेजे हैं। इनमें नरवर किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन करने, किले तक पहुंचने के लिए अप्रोच रोड बनाने और इसे प्रमुख पर्यटन सर्किट से जोड़ने के प्रस्तावों पर नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
500 फीट ऊंचाई पर इतिहास से रूबरू होने के लिए बेहतर सड़क, नियमित रखरखाव और पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। स्थानीय स्तर पर मांग उठती रही है कि वन विभाग और पीडब्ल्यूडी के समन्वय से करीब 500 फीट ऊंचाई पर स्थित किले तक पहुंच मार्ग बनाया जाए। अब यह मांग केंद्रीय और प्रदेश सरकार के स्तर तक पहुंचने से संरक्षण की दिशा में आगे की कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
*एएसआई के हवाले हुआ तो बदल सकती है तस्वीर*
किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन करने की मांग भी प्रस्ताव का अहम हिस्सा है। इसके पीछे उद्देश्य ऐतिहासिक संरचनाओं को सुरक्षित रखना, व्यवस्थित रखरखाव करना और पुरातात्विक महत्व के अनुरूप संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही रणथंभौर- कूनो- शिवपुरी- नरवर- ओरछा- खजुराहो को जोड़कर पर्यटन सर्किट बनाए जाने का प्रस्ताव है।
*पर्यटक आएंगे तो युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते*
नरवर किले के संरक्षण और पर्यटन विकास का फायदा केवल ऐतिहासिक धरोहर तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, होटल, होम-स्टे, परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन सेवाओं में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
