इंदौर: इंदौर मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है. चर्चा इस बात की ज्यादा है कि आखिर कब आएगा ? ऐसी संभावना है कि जीआईएस 27 के पहले इंदौर मास्टर प्लान घोषित हो जाएगा. इस बार प्रस्तावित मास्टर प्लान में तीन जिलों की सीमा तक जमीनों को शामिल कर लिया गया है. खास बात यह है कि मास्टर प्लान घोषित होने का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि 5 साल पहले मास्टर प्लान 2021 की समय सीमा खत्म हो चुकी है.
2026 बीतने को है, लेकिन नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट लागू नहीं हो सका है. प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर मीट (जीआईएस) के साथ मास्टर प्लान आ सकता है. इंदौर जिले के मास्टर प्लान को लेकर शहर के आसपास 79 गांव की जमीनों पर प्रत्यक्ष रूप से रोक लगा रखी है. मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से कवायद चल रही है कि एक महीने में होगा, एक हफ्ते में या एक पखवाड़े में होगा। वहीं भोपाल का मास्टर प्लान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू हो गया, जिसको दो महीने से ज्यादा हो चुके है. बताया जा रहा है कि मास्टर प्लान में 79 गांव की जमीन शामिल है और 3 जिलों की सीमा से सीधा जोड़ दिया है.
करीब 950 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मास्टर प्लान का एरिया होगा. पिछले 2021 के मास्टर प्लान में 50 हजार हेक्टेयर जमीन को शामिल किया गया था. एक बार करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन को शामिल करने की चर्चा है. इससे बढ़कर यह है कि उज्जैन, देवास और धार जिले की सीमा तक की जमीनों को मास्टर प्लान में शामिल किया गया है. इंदौर शहर के हरदा रोड को छोड़कर बाकी उक्त तीनों जिलों के बाद शहर सीमा समाप्त हो जाएगी, यानि इसके बाद मास्टर प्लान बनाने की गुंजाइश ही नहीं बचेगी.
5 साल से था इंतजार
पिछले मास्टर प्लान-2021 की समय-सीमा 5 साल पहले ही समाप्त हो चुकी है. लंबे समय से नए दिशा-निर्देश न होने के कारण शहर के रियल एस्टेट सेक्टर और निवेश परियोजनाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी. नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने इसका बुनियादी ड्राफ्ट तैयार कर शासन को सौंप दिया है. मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री ने भी हाल ही में संकेत दिए हैं कि भोपाल का ड्राफ्ट आने के बाद अब जल्द ही इंदौर के मास्टर प्लान का आधिकारिक प्रारूप जनता के सामने दावों-आपत्तियों के लिए रख दिया जाएगा.
कहते है एक्सपर्ट…
टीएनसीपी के सेवानिवृत संयुक संचालक डी.एल. गोयल का कहना है कि मास्टर प्लान जल्दी लागू हो. उसमें मेट्रो स्टेशन के पास पार्किंग, मेजर रोड की मार्किंग, आउटर सिटी में ट्रांसपोर्ट सब टर्मिनल, आईएसबीटी के पास कुमेडी में रेलवे स्टेशन का प्रावधान यथावत रखना ओर उसका निर्माण, शहर के हर इलाके में सीटी सेंटर निर्माण और 24 मीटर से बड़ी सड़क पर मिश्रित उपयोग का प्रावधान किया जाना चाहिए. गोयल ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर पुराने मास्टर प्लान में गठित कमेटी द्वारा ग्रीन बेल्ट का जमीनों पर ना कब्ज़े हटे और ना ही नया हरित क्षेत्र विकसित करने का प्लान बनाया. नए मास्टर प्लान में हरित क्षेत्र पद सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की बहुत आवश्यकता है, वर्ना भविष् में दिल्ली जैसे हालात बन सकते है.
*पुराना मास्टर प्लान ही पूरा लागू नहीं हो पाया
– पुराने मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट में सैकड़ों कॉलोनियों बनी हुई ओर नए ग्रीन बेल्ट नहीं बनाएं.
– मास्टर प्लान की सभी सड़कें अधूरी
– शहर में मास्टर प्लान के अनुसार सड़क, पानी और बिजली का काम ही नहीं हुआ.
– मास्टर जलाशयों के निर्माण और पुराने जल स्रोत की सुरक्षा में नियमों का पालन नहीं.
– मास्टर प्लान की जमीनों पर योजना अनुसार विकास नहीं.
– इंदौर की वर्तमान स्थिति में 50 प्रतिशत जमीनों का उपयोग आज भी मास्टर प्लान के अनुसार नहीं हो पाया.
– नया रेलवे स्टेशन और शहर के चारों तरफ प्लान के अनुसार बस स्टैंड, अनाज मंडी, सब्जी मंडी, ट्रांसपोर्ट हम, मेडिकल हब, स्कूल कॉलेज की जमीनों का विकास ही नहीं.
मेट्रो कॉरिडोर, नई सड़कें और इंफ्रास्ट्रख्र पर मुख्य फोकस
महानगरीय विकास के साथ बेहतर तालमेल बिठाने के लिए इस प्लान में कई बड़े बुनियादी बदलाव शामिल हैं-
– कनेक्टिविटी: शहर में यातायात के दबाव को कम करने के लिए मेट्रो कॉरिडोर के विकास के साथ-साथ एक दर्जन से अधिक नई मास्टर प्लान सड़कों और 19 नए पुलों का प्रावधान किया गया है।
– नई टाउनशिपः सुव्यवस्थित विकास के लिए शहर के बाहरी इलाकों में 12 से 15 नई अत्याधुनिक टाउनशिप विकसित करने की योजना है।
– कमर्शियल और ग्रीन बेल्टः मेट्रो रूट और मुख्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के आसपास हाई एफएआर देने का प्रस्ताव है. साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए यशवंत सागर, माचल और उमरीखेड़ा जैसे इलाकों में एक बड़ा ग्रीन बेल्ट सुरक्षित रखा जाएगा
