नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2025 : बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट दिखने वाला ‘इंडिया’ गठबंधन पश्चिम बंगाल में बिखरता हुआ नजर आ रहा है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले SIR का यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है। इस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस मुद्दे पर खुद को अलग-थलग महसूस कर रही है, क्योंकि कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियाँ इस पर सतर्क रुख अपना रही हैं, जिससे विपक्षी एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर को एक ‘पूर्व नियोजित साजिश’ करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि इसके जरिए हजारों मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि 2002 की मतदाता सूची और हाल ही में अपलोड की गई सूची के बीच गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। दूसरी तरफ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने साफ किया कि कांग्रेस पूरी तरह SIR के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह इस प्रक्रिया के ‘वक्त और तरीके’ का विरोध कर रही है, क्योंकि विधानसभा चुनाव के लिए समय बहुत कम बचा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में कांग्रेस न तो तृणमूल के साथ खड़ी दिखना चाहती है और न ही एसआईआर का खुला विरोध करके कोई मौका गंवाना चाहती है, क्योंकि राज्य में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका निभाती रही है। यह राजनीतिक मजबूरी ‘इंडिया’ गठबंधन में दरार पैदा कर रही है। यह दरार आगामी संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्षी दलों की रणनीति को कमजोर कर सकती है, खासकर जब 12 राज्यों में SIR की प्रक्रिया चल रही है।

