इंदौर: शहर के ब्रिलिएंट कन्वेशन सेंटर में अर्बन कॉन्क्लेव में हाईकोर्ट से जिस जमीन का स्थगन है, उसको निवेशकों देने के लिए शामिल किए जाने की चर्चा है. खास बात यह है कि उक्त जमीन पर शासन के ही हाऊसिंग बोर्ड ने स्टे ले रखा है. सामान्य तौर पर कोर्ट में विचाराधीन कोई भी मामले में खरीदी, बिक्री या आवंटन नहीं किया जा सकता है.
मामला यूं है कि इंदौर पंजीयन विभाग ने मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल पर हुकुमचंद मिल की जमीन में स्टाम्प शुल्क चोरी के मामले में 19 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि जमा करने आदेश दिए थे. उक्त 19 करोड़ की राशि 28 फरवरी तक जमा करने का समय दिया था. ध्यान रहे कि हुकुमचंद मिल की जमीन मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल ने 489.89 करोड़ का सौदा किया था और नगर निगम ने 218 करोड़ रुपए की रजिस्ट्री कारवाई गई है. इस तरह सरकार के एक विभाग ने दुसरे विभाग को स्टाम्प शुल्क कम चुकाकर नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया था. सरकार ने हुकुमचंद मिल की देनदारिया निपटाने के लिए नगर निगम को जमीन बेचने की अनुमति दी थी. उक्त जमीन को मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल को नगर निगम ने 489.89 करोड़ में बेचा है.
सरकार द्वारा उक्त राशि से हुकुमचंद मिल की देनदारिया चुकाई गई. गृह निर्माण मंडल ने नगर निगम से 23 मार्च 2025 को अपने पक्ष में रजिस्ट्री कारवाई है. नगर निगम ने हुकुमचंद मिल जमीन की कीमत 218 करोड़ रुपए बताकर की थी.
उक्त मामले में प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता और अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने मय दस्तावेज लोकायुक्त पुलिस, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, महानिरीक्षक पंजीयन तथा वरिष्ठ जिला पंजीयक क्षेत्र 3 इंदौर को शिकायत की थी. एड्वोकेट प्रमोद कुमार व्दिवेदी ने शिकायत के साथ हाईकोर्ट का आदेश, संपत्ति ब्यौरा, संपत्ति के फोटो तथा अन्य जानकारी भी दी थी.
शिकायत के आधार पर वरिष्ठ जिला पंजीयक समरथमल राठौड़ ने प्रकरण दर्ज कर नोटिस दिया. नगर निगम एवं गृह निर्माण मंडल ने मामले में जवाब प्रस्तुत किए. शिकायतकर्ता द्विवेदी के सबूत सही पाए गए. वरिष्ठ जिला पंजीयक क्षेत्र 3 के राठौड़ ने हुकुमचंद मिल की रजिस्ट्री में स्टाम्प शुल्क कम जमा करने का मामला सही पाया है. गृह निर्माण मंडल को 19 करोड़ 5 लाख रुपए से ज्यादा स्टाम्प ड्यूटी जमा करने के आदेश जारी कर दिया है. साथ ही 2′ ब्याज एवं पेनल्टी भी लगाई थी.
अधिवक्ता प्रमोद द्विवेदी के अनुसार पंजीयन विभाग के उक्त आदेश के खिलाफ हाउसिंग बोर्ड ने 19 करोड़ रुपए राशि जमा करने के विरुद्ध हाईकोर्ट से ही स्थगन आदेश ले रखा है. द्विवेदी ने बताया कि हुकुमचंद मिल की जमीन को अर्बन कॉन्क्लेव में निवेशकों को बेचने या आवंटित करने के लिए शामिल किया गया है. अधिवक्ता द्विवेदी ने बताया कि कोर्ट द्वारा जिस जमीन पर स्टे किया है, उसको किसी भी तरह से भी आवंटित या बेचा नहीं जा सकता है. उक्त मामले हाईकोर्ट की अवमानना का प्रकरण दर्ज हो सकता है.
