इंदौर: शहर के ऐतिहासिक राजवाड़ा क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बदहाल है और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी के सामने नियम-कानून बेअसर नजर आ रहे हैं. सिटी बसों का संचालन बंद होने के बाद क्षेत्र में ई-रिक्शा और ऑटो की बेतरतीब पार्किंग बढ़ गई है.
हालात यह हैं कि दुकानों के सामने वाहन खड़े कर सवारियां बैठाई जा रही हैं और व्यस्त मार्गों पर अवैध स्टैंड संचालित हो रहे हैं। इससे बाजार में आने वाले ग्राहकों और व्यापारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सवाल यह है कि जब राजवाड़ा जैसे संवेदनशील और व्यस्त क्षेत्र में पुलिस चौकी मौजूद है, तो फिर सड़कों पर इस तरह की मनमानी आखिर कैसे चल रही है?
कलर कोडिंग हुई, लेकिन नियमों का पालन कहां?
ई-रिक्शा की पहचान और संचालन को व्यवस्थित करने के लिए कलर कोडिंग की व्यवस्था की गई, लेकिन व्यापारियों का आरोप है कि इसका जमीन पर कोई प्रभावी असर दिखाई नहीं दे रहा. नो-एंट्री के नियमों के बावजूद ई-रिक्शा चालक जगह-जगह वाहन खड़े कर सवारियां बैठाते हैं. सवारियां लेने की होड़ में चालकों के बीच विवाद और गाली-गलौज की स्थिति भी बनती है. दुकानों के सामने वाहन खड़े होने से ग्राहकों का आना-जाना प्रभावित होता है, लेकिन इस समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है
पुलिस हटाती है, कुछ देर बाद फिर जम जाता है जमावड़ा
व्यापारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई केवल कुछ समय के लिए असर दिखाती है. वाहन हटाए जाते हैं, लेकिन कुछ ही देर बाद चालक फिर उसी जगह लौट आते हैं. यदि कार्रवाई के बाद भी वही स्थिति बार-बार बन रही है, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है. राजवाड़ा क्षेत्र में यातायात नियंत्रण के लिए जिम्मेदार एजेंसियों को यह तय करना होगा कि नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाए और अवैध स्टैंडों पर स्थायी रोक कैसे लगे.
उल्लंघन करने वालों पर हो सख्तीः राजेश सुगन्धि
व्यापारी राजेश सुगन्धि ने कहा कि प्रशासन को राजवाड़ा क्षेत्र में ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड और पार्किंग की स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए. कलर कोडिंग जैसी व्यवस्था तभी सफल होगी, जब नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए. उन्होंने अवैध स्टैंड हटाने और नियम तोड़ने वाले चालकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की, ताकि व्यापारियों और आम नागरिकों को राहत मिल सके.
राजवाड़ा को नो-व्हीकल जोन बनाने की मांगः आनंद पाटीदार
व्यापारी आनंद पाटीदार ने राजवाड़ा को नो-व्हीकल जोन बनाने की मांग करते हुए कहा कि सिटी बसों का संचालन बंद होने के बाद ई-रिक्शा चालक जगह-जगह वाहन खड़े कर सवारियां बैठाने लगे हैं. उन्हें हटने के लिए कहने पर गाली-गलौज और धमकियां मिलने की शिकायतें भी हैं. उन्होंने कहा कि पहले वाहनों की आवाजाही सीमित करने से यातायात में सुधार हुआ था. ऐसे में प्रशासन को दोबारा सख्त व्यवस्था लागू करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
कार्रवाई के बाद भी नहीं सुधरते हालातः संजय साहू
व्यापारी संजय साहू ने बताया कि सिटी बसों का संचालन बंद होने के बाद भी राजवाड़ा क्षेत्र की यातायात समस्या खत्म नहीं हुई है. अब ऑटो और ई-रिक्शा सड़क तथा दुकानों के सामने खड़े रहते हैं. पुलिस इन्हें हटाती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति बन जाती है. उन्होंने राजवाड़ा को नो-व्हीकल जोन बनाकर केवल व्यवस्थित आवागमन की अनुमति देने की मांग की.
प्रशासन कब करेगा स्थायी समाधान?
राजवाड़ा केवल खरीदारी का प्रमुख केंद्र नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान भी है. इसके बावजूद यहां यातायात और पार्किंग व्यवस्था का इस तरह बिगड़ना चिंता का विषय है. केवल कुछ देर के लिए वाहन हटाना समाधान नहीं है. जरूरत ऐसी सख्त और निरंतर व्यवस्था की है, जिससे सड़कें अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग से मुक्त हों तथा राजवाड़ा आने वाले नागरिकों को राहत मिल सके.
जल्द ही किया जाएगा नो व्हीकल जोन
ट्रैफिक पुलिस अधिकारी सुप्रिया चौधरी ने बताया कि जल्द ही त्योहारों को मद्देनजर रखते हुए राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्र को नो व्हीकल जोन किया जाएगा वही जल्द ही रिक्शा ई रिक्शा को राजवाड़ा क्षेत्र में प्रतिबंधित कर यातायात सुगम बनाया जाएगा
