इंदौर: क्रिसेंट वाटर पार्क के सामने उमरिया खुर्द में तेंदुओं की लगातार मौजूदगी ने वन विभाग के सामने उनकी संख्या और गतिविधियों का पता लगाने की चुनौती खड़ी कर दी है. इस साल इसी क्षेत्र से तीन तेंदुओं का रेस्क्यू किया जा चुका है. अब घायल तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे में स्वस्थ तेंदुआ मिलने के बाद ग्रामीणों का दावा है कि घायल तेंदुआ अब भी इलाके में घूम रहा है.
उमरिया खुर्द में तेंदुए की लगातार मूवमेंट की खबर मिलने पर नव भारत की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से बात की. चर्चा में पता चला कि यहां पहले एक तेंदुआ कुएं में गिर गया था, जबकि दो अन्य तेंदुओं को वन विभाग की टीम पकड़कर ले गई थी. पिछले दिनों ग्रामीणों ने एक घायल तेंदुए का वीडियो भी बनाया था. इसके बाद वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया. अगले ही दिन पिंजरे में एक तेंदुआ फंस गया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह वीडियो में दिखा घायल तेंदुआ नहीं है. पिंजरे में आया तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ था. डीएफओ लाल सुधाकर सिंह ने भी पकड़े गए तेंदुए के स्वस्थ होने की पुष्टि की.
ग्रामीण वीरेंद्र बुंदेला ने नव भारत को बताया कि क्षेत्र में तेंदुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है. एक अन्य ग्रामीण राधेश्याम ठाकुर ने भी इलाके में एक और तेंदुए की गतिविधियां देखे जाने की बात कही. वन विभाग के एसडीओ सुभाष शर्मा का कहना है कि इसी क्षेत्र से इस साल तीन तेंदुओं का रेस्क्यू कर चोरल के जंगलों में छोड़ा जा चुका है. उनका कहना है कि क्षेत्र में छह से ज्यादा तेंदुए होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया. ऐसे में ग्रामीणों के सामने सवाल है कि पिंजरे में पकड़ा गया तेंदुआ कौन-सा है और घायल तेंदुआ अब भी आसपास मौजूद है या नहीं.
साढ़े तीन सौ घरों के आसपास जंगल और खेत…
उमरिया खुर्द में करीब 350 घर हैं और यहां मतदाताओं की संख्या 1500 से 1700 के बीच है. गांव के आसपास पहाडç¸यां और जंगल हैं, जबकि ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर हैं. यहां गाजर और चुकंदर की खेती बड़े पैमाने पर होती है. ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में जंगली सुअर बड़ी संख्या में आते हैं. इन्हीं का शिकार करने के लिए तेंदुए जंगल से निकलकर खेतों तक पहुंचते हैं.
जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान…
उमरिया खुर्द की पहाडç¸यों में जंगली सुअरों के अलावा नीलगाय, खरगोश और हिरण भी बड़ी संख्या में हैं. इनमें से सबसे ज्यादा सुअर खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. ग्रामीणों ने गांव के आसपास मौजूद करीब 15 कोल्ड स्टोरेज से निकलने वाले सड़े माल को भी जंगली जानवरों की आवाजाही की एक वजह बताया. उनका आरोप है कि खराब माल जंगल से लगे क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है, जिससे जंगली जानवर गांव के आसपास आकर्षित होते हैं. वहीं राधेश्याम ठाकुर ने बताया कि तेंदुओं की मौजूदगी के बावजूद अब तक किसी इंसान या पालतू जानवर पर हमले की घटना सामने नहीं आई है. फिर भी जंगल और खेतों के बीच तेंदुओं की लगातार आवाजाही को देखते हुए ग्रामीणों में डर है. फिलहाल घायल तेंदुए की मौजूदगी और क्षेत्र में सक्रिय तेंदुओं की वास्तविक संख्या का पता लगाना वन विभाग के लिए अहम है.
