इंदौर: शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशन इंदौर के प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच बनी अधिक दूरी यात्रियों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनी हुई है. खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों और चलने-फिरने में असमर्थ यात्रियों को इस स्थान पर ट्रेन में चढ़ने और उतरने के दौरान भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. स्थिति ऐसी है कि जरा-सी चूक भी किसी यात्री के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. इसके बावजूद इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में रेलवे प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देने से यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर आने वाली ट्रेनों के कई कोचों में ट्रेन के पायदान और प्लेटफॉर्म के बीच काफी अंतर होने के कारण यात्रियों को संभलकर चढ़ना और उतरना पड़ता है. सामान्य यात्रियों को भी यहां परेशानी होती है, लेकिन बुजुर्गों और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह स्थिति और अधिक जोखिम भरी हो जाती है. ट्रेन में चढ़ते समय पैर फिसलने या उतरते समय संतुलन बिगड़ने पर यात्री सीधे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की खाली जगह में गिर सकता है. ऐसे में किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
बुजुर्ग यात्रियों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी
रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं. इनमें बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और ऐसे यात्री भी शामिल होते हैं जिन्हें चलने-फिरने में परेशानी होती है. प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच अधिक अंतर होने के कारण इन यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने या उतरने के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ सकती है. कई बार जल्दबाजी, भीड़ और ट्रेन के निर्धारित ठहराव के दौरान समय की कमी के चलते स्थिति और भी जोखिमपूर्ण हो जाती है.
पहले भी हो चुके हैं हादसे
इस स्थान पर पहले भी हादसे हो चुके हैं है. बावजूद इसके यदि ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की दूरी को लेकर अब तक ठोस सुधार नहीं हुआ है, तो यह रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और समस्या के प्रति गंभीरता पर सवाल खड़े करता है. रेलवे प्रशासन को चाहिए कि प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर आने वाली ट्रेनों के सभी संबंधित कोचों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए. जहां भी ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच असुरक्षित अंतर पाया जाता है, वहां निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार सुधार किया जाए, ताकि यात्रियों को जान जोखिम में डालकर ट्रेन में चढ़ने-उतरने के लिए मजबूर न होना पड़े.
बड़े अधिकारी दौरा कर लौट जाते हैं
इंदौर रेलवे स्टेशन पर समय-समय पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षण और दौरे करने पहुंचते हैं. इन दौरों के दौरान व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाती है और कई बार अधिकारियों के निरीक्षण की खबरें भी प्रमुखता से प्रकाशित होती हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या इन निरीक्षणों के दौरान प्लेटफॉर्म नंबर 3 जैसी गंभीर समस्या पर भी ध्यान दिया जा रहा है? दो दिन पहले मंडल रेल प्रबंधक डीआरएम अश्विन कुमार के यात्रियों के बीच पहुंचकर संवाद करने की जानकारी के संदर्भ में प्लेटफॉर्म नंबर 3 की यह समस्या भी सवाल खड़े करती है रेलवे की जनसंवाद कार्यक्रम में पहुंचे लेकिन इस समस्या का कोई जिक्र नहीं. प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच असुरक्षित अंतर जैसी समस्या को नजरअंदाज करना यात्रियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और तकनीकी मानकों के अनुरूप स्थायी समाधान निकालें.
क्या कहते हैं यात्री…
उज्जैन के अनीता सूर्यवंशी ने बताया कि इस तरह की गेप से बड़ा हादसा हो सकता है मेरे जैसी बुजुर्ग महिलाएं समस्या का सामना करना पड़ता है.
इंदौर से अपने गंतव्य की ओर जा रहे रामस्वरूप ने बताया कि स्टेशन पर इस तरह की स्थिति के कारण यात्रियों को ट्रेन के डिब्बों में चढ़ते और उतरते समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है. जरा-सी लापरवाही हादसे का कारण बन सकती है. स्थानीय यात्रियों को यहां की स्थिति की जानकारी होने से वे सतर्क रहते हैं, लेकिन बाहर से आने वाले यात्रियों को अचानक उतरते समय परेशानी हो सकती है और वे दुर्घटना का शिकार भी हो सकते है.
पुनर्विकास के दौरान समस्या दूर करने की योजना
इस संबंध में रेलवे अधिकारी मूकेश कुमार के अनुसार, इंदौर रेलवे स्टेशन के दोनों छोर पर जगह सीमित होने के कारण ट्रैक और प्लेटफॉर्म का घुमावदार होना इसकी प्रमुख वजह है, घुमाव के कारण ट्रेन के डिब्बों और प्लेटफॉर्म के बीच अधिक अंतर रह जाता है. अधिकारियों ने बताया कि इंदौर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास कार्य प्रस्तावित है। इसके तहत स्टेशन के घुमावदार हिस्सों में सुधार के साथ रेलवे यार्ड की री-मॉडलिंग भी की जाएगी. पुनर्विकास के दौरान इन तकनीकी समस्याओं को दूर करने की योजना है
