श्री राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में अनिल के. एंटनी की पुस्तक ‘एडवांटेज इंडिया : रिशेपिंग द फ्यूचर फॉर एन इक्विटेबल वर्ल्ड’ का विमोचन करते हुए यह बात कही। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन पर लेखक और पुस्तक की प्रकाशक को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना केवल आकांक्षा नहीं, बल्कि दायित्व भी है और इस लक्ष्य को हासिल करने में देश के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यतागत विरासत, लोकतांत्रिक परंपराएं और तकनीकी क्षमताएं उसकी विशिष्ट ताकत हैं।
उपराष्ट्रपति ने भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की कूटनीति अधिक व्यापक और प्रभावशाली हुई है। उन्होंने जी-20 की भारत की अध्यक्षता, अफ्रीकी संघ को समूह में शामिल कराने में भारत की भूमिका और वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में देश के उभरने को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ भारत की मार्गदर्शक विचारधारा है, जिसका परिचय कोविड-19 महामारी के दौरान 100 से अधिक देशों को कोविड टीके उपलब्ध कराकर भारत ने दिया था।
श्री राधाकृष्णन ने उम्मीद जताई कि श्री एंटनी की पुस्तक युवा भारतीयों को प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक नीति, अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राष्ट्र निर्माण को गहराई से समझने तथा इनमें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगी। पुस्तक विमोचन के अवसर पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय सूद, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य एवं अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि तथा रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध संपादक कपिश मेहरा और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
