मानसून विदा, बांध खाली; अक्टूबर में ही पानी के लिए तरस रहे शहरवासी

छिंदवाड़ा। मानसून विदा हो चुका है, लेकिन जिले के बांधों और जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं है। कम बारिश का असर अब शहर की पेयजल व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे हैं कि अक्टूबर माह में ही शहरवासियों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। नगर निगम ने जल संकट से निपटने के लिए जलापूर्ति व्यवस्था में बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब तक रोजाना पानी पाने वाले 17 वार्डों में एक दिन के अंतराल से जलापूर्ति की जाएगी। इससे बचने वाले पानी को अन्य 31 वार्डों में उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, पानी की बर्बादी करने वालों पर दो हजार से पांच हजार रुपये तक जुर्माना लगाने की तैयारी है। जिले में सामान्य तौर पर मानसून के दौरान लगभग 1059 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। इससे पेयजल की समस्या काफी हद तक दूर हो जाती है, लेकिन इस वर्ष कम बारिश के कारण जलस्रोतों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाया। शहर की जलापूर्ति के प्रमुख स्रोत माचागोरा बांध में इस बार लगभग 70 प्रतिशत जलभराव हुआ है। वहीं, कन्हारगांव बांध की स्थिति और चिंताजनक बताई जा रही है। इसमें महज पांच से दस प्रतिशत पानी भरने की जानकारी सामने आई है। जिले के माचागोरा और कन्हारगांव बांध सहित अन्य 44 जलाशयों में भी जलभराव की स्थिति कमजोर रही है।

17 वार्डों में अब रोज नहीं मिलेगा पानी ००००

नगर निगम आयुक्त सीपी राय के अनुसार, माचागोरा बांध से जिन 17 वार्डों में रोजाना पानी की आपूर्ति की जा रही थी, वहां अब एक दिन के अंतराल से पानी दिया जाएगा। इससे बचने वाले पानी का उपयोग कन्हारगांव बांध पर निर्भर शेष 31 वार्डों में जलापूर्ति के लिए किया जाएगा। निगम का प्रयास है कि सीमित जल भंडार के बीच सभी वार्डों में पेयजल की व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

10 से 15 दिन में मिल रहा पानी ००००००

नगर निगम की ओर से एक दिन के अंतराल पर जलापूर्ति का दावा किया जा रहा है, लेकिन कई वार्डों के रहवासियों की शिकायत है कि उन्हें 10 से 15 दिन में एक बार पानी मिल रहा है। इससे घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। पार्षद आकाश मोखलगाय ने बताया कि कई जगह लगभग 30 साल पुरानी पाइपलाइन होने से पानी का दबाव कम रहता है। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन नालियों से होकर गुजरती है। इस समस्या से निगम आयुक्त को भी अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में जल संकट के बीच पुरानी पाइपलाइन और कमजोर वितरण व्यवस्था भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।

किसानों से भी पानी बचाने की अपील ०००००००

जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में सांसद ने किसानों से कम पानी में तैयार होने वाली फसलें, जैसे चना, सरसों और मटर लगाने की अपील की। साथ ही गेहूं की बोवनी उपलब्ध सिंचाई जल का आकलन करने के बाद ही करने की सलाह दी गई, ताकि सीमित जल भंडार का उपयोग सोच-समझकर किया जा सके।

पानी बर्बाद किया तो लगेगा जुर्माना ००००००

नगर निगम ने नागरिकों से पानी का अनावश्यक उपयोग नहीं करने की अपील की है। आयुक्त सीपी राय के अनुसार, पानी की बर्बादी करने वालों को चेतावनी देने के बाद दो हजार से पांच हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। अब देखना होगा कि जलापूर्ति में बदलाव और सख्ती के बावजूद निगम शहरवासियों को नियमित पेयजल उपलब्ध कराने में कितना सफल हो पाता है।

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