इंदौर:शहर में आईडीए द्वारा निर्मित आईएसबीटी पर बसों का संचालन 28 अक्टूबर से ट्रायल रन शुरू करने का निर्णय लिया गया है. आज स्मार्ट सिटी कार्यालय में उक्त विषय को लेकर आयोजित बैठक में गुजरात और राजस्थान जाने वाली बसों को ट्रायल रन में शामिल किया गया है. यह बात अलग है कि शहर के पश्चिम और दक्षिण क्षेत्र से आईएसबीटी जाने के लिए यात्रियों को निजी वाहन के अलावा कोई साधन नहीं है. यात्रियों को सरवटे और गंगवाल बस स्टैंड से आईएसबीटी कैसे भेजेंगे, सवाल यह है?
आज शहर से बाहर जाने वाली बसों को एमआर 10 स्थित आईएसबीटी कुमेड़ी से संचालित करने को लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा स्मार्ट सिटी में बैठक ली. बैठक में अभी बसों का एक माह तक ट्रायल रन होगा. इसके पीछे मूल बात यह है कि प्रशासन ने शहर में विभिन्न क्षेत्रों से गुजरात और राजस्थान जाने वाली करीब 3 सौ बसों का संचालन आईएसबीटी से करने की योजना बनाई है.
बैठक में निर्णय लिया गया कि कुमेड़ी स्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल पर ट्रायल रन 28 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा. फिलहाल लंबी दूरी के मार्गों पर संचालित होने वाली बसों को आईएसबीटी से संचालित करने का निर्णय लिया गया है. प्रस्तावित ट्रायल रन के द्वारा टर्मिनल की संचालन व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य में सुचारू संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां की जा सकें. बैठक में निर्धारित रूट के शहरों को जाने वाली बसों के संचालकों के प्रतिनिधियों ने भी ट्रायल रन के लिए मौखिक स्वीकृति दे दी है. ध्यान रहे कि आईडीए ने पुणे की बीवीजी कंपनी को आईएसबीटी का संचालन का ठेका दिया है. बीवीजी ने आईडीए से विधिवत कब्जा लेकर दुकानों, रेस्टोरेंट और ऑफिस किराए पर देने के लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया है. बैठक में आईडीए सीईओ संदीप केरकेट्टा, स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन, आरटीओ प्रदीप शर्मा, यातायात पुलिस एडिशनल डीसीपी कोल, प्राधिकारी एवं ए.आय.सी.टी.एस.एल. वरिष्ठ अधिकारी तथा लंबी दूरी की बसों के संचालक के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
फेरी वाहन बिना ट्रायल रन का संचालन कैसे ?
प्रशासन ने आज आईएसबीटी से ट्रायल रन संचालन का निर्णय तो कर लिया, लेकिन शहर के पश्चिम और दक्षिण क्षेत्र सहित बायपास से बस अड्डे तक यात्री पहुंचेंगे कैसे? सवाल यह है. राजेंद्र नगर, सुदामा नगर, नायता मुंडला, बायपास की सैकड़ों कॉलोनियों के रहवासियों के लिए आईएसबीटी जाने के लिए सिर्फ निजी वाहन ही है. इस सबसे बढ़कर सरवटे और गंगवाल बस स्टैंड से फेरी वाहन की सुविधा भी नहीं है. गुजरात और राजस्थान जाने के लिए गंगवाल बस स्टैंड शहर के अंदर और आखरी छोर पर है, जहां से आसानी से बस पकड़ने के लिए साधन है. मगर आईएसबीटी जाने के लिए पश्चिम और दक्षिण क्षेत्र सहित बायपास के यात्रियों को 300 से 400 सौ रुपए अतिरिक्त भाड़े के रूप में देना पड़ेंगे. यात्री गुजरात और राजस्थान जाने के लिए गंगवाल बस स्टैंड को अंतिम रास्ता मानकर चुनेंगे. इस पर प्रशासन को सोचने की जरूरत है.
एमआर 4 अधूरी, सीधी कनेक्टिविटी में बस्ती बाधक
प्रशासन ने आईएसबीटी से ट्रायल रन करने का निर्णय भले ही ले लिया हो, लेकिन सरवटे बस स्टैंड से कुमेडी जाने के लिए मास्टर प्लान की एमआर 4 सड़क अभी भी अधूरी पड़ी है. सड़क में भागीरथपुरा के करीब 8 सौ कच्चे पक्के मकान बाधक हैं. अभी तो सीधी सड़क की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में प्रशासन का ट्रायल रन सफल कैसे होगा? सवाल यह है
