शहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन का किया बचाव

श्री शरीफ ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए पेशावर में संघीय शीर्ष समिति की बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। गत 11 अक्टूबर को गवर्नर शासन और आपातकाल लागू होने के बाद यह उनकी प्रांत की पहली यात्रा थी। बैठक में पाकिस्तान के सेना प्रमुख एवं रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर, खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी, संघीय मंत्री और नवनियुक्त प्रांतीय सलाहकार शामिल हुए।

खैबर पख्तूनख्वा को खूबसूरत प्रांत बताते हुए श्री शरीफ ने इसे पाकिस्तान के अन्य हिस्सों के बराबर विकास के स्तर पर लाने का वादा किया।

उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि हम दिन-रात मेहनत करेंगे और विकास तथा समृद्धि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे। मैं वादा करता हूं कि फील्ड मार्शल के सहयोग से हम इस प्रांत में खुशहाली वापस लाएंगे।”

श्री शरीफ ने कहा कि सशस्त्र बलों, सुरक्षा एजेंसियों और आम नागरिकों के बलिदान से 2017 और 2018 तक खैबर पख्तूनख्वा सहित पूरे पाकिस्तान में शांति बहाल हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि आतंकवाद के खिलाफ देश की लड़ाई में करीब 80,000 लोग मारे गए और अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ।

उन्होंने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व वाली पिछली प्रांतीय सरकार पर आतंकवाद के खात्मे के वर्षों के प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शांति स्थापित होने के बाद उग्रवादियों को वापस आने की अनुमति दी गई, जिसके परिणामस्वरूप खैबर पख्तूनख्वा के निवासियों को नुकसान उठाना पड़ा। आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में कई राजनीतिक परिवारों को भी नुकसान हुआ।

प्रधानमंत्री ने पिछली प्रांतीय सरकार पर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक सुरक्षा की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उसके कार्यकाल में पुलिस के 5,000 पद खाली रहे और सुरक्षित शहर परियोजना अब तक अधूरी है।

उन्होंने आतंकवाद निरोधक विभाग (सीटीडी), पुलिस प्रशिक्षण तथा सुरक्षा कर्मियों को आधुनिक हथियार और उपकरण उपलब्ध कराने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने की भी आलोचना की।

श्री शरीफ ने कहा कि राष्ट्रीय वित्त आयोग (एनएफसी) पुरस्कार के तहत आतंकवाद विरोधी प्रयासों के लिए खैबर पख्तूनख्वा को 800 अरब पाकिस्तानी रुपये से अधिक की राशि मिली थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 के एनएफसी पुरस्कार के तहत आतंकवाद के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर भूमिका को देखते हुए अन्य प्रांतों ने खैबर पख्तूनख्वा को अतिरिक्त संसाधन देने पर सहमति जताई थी। उन्होंने इस वित्तीय सहायता के बावजूद आतंकवाद के फिर बढ़ने पर अफसोस जताया।

उन्होंने पिछली प्रांतीय सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उनके अनुसार, स्वच्छ पेयजल परियोजना में 100 अरब पाकिस्तानी रुपये का गबन किया गया और कोहिस्तान के बड़े घोटाले में 37 अरब रुपये का भ्रष्टाचार सामने आया। उन्होंने प्लेसर गोल्ड परियोजना के ठेके चहेते लोगों को दिए जाने का भी आरोप लगाया।

श्री शरीफ ने कहा कि प्रांत की समस्याओं के समाधान में मदद के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों वाली एक सलाहकार परिषद गठित की गई है। उन्होंने गवर्नर शासन लागू करने में समर्थन देने के लिए गठबंधन सहयोगियों, विशेष रूप से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के अध्यक्ष नवाज शरीफ का आभार जताया।

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