संसद के सत्रावसान के लिए समय-सीमा तय नहीं, राष्ट्रपति को अधिकार : बिरला

श्री बिरला ने गुरुवार को यहां संसद भवन परिसर के संसदीय सौंध में 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के आयोजन को लेकर हुए संवाददाता सम्मेलन में संवाद को संसदीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि भारत में जब-जब ऐसे वैश्विक संवाद हुए हैं वे प्रेरणा देकर गये हैं।

संसद के सत्रावसान संबंधी सवाल पर श्री बिरला ने कहा कि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 85 में प्रावधान है और सत्रावसान के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है। यह पूछने पर कि सत्रावसान नहीं होने का रिकार्ड बन रहा है उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड नहीं है, इससे पहले भी सत्रावसान इससे अधिक समय तक नहीं हुआ था। इस बीच, लोकसभा सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 14वीं लोकसभा के दौरान वामपंथी दलों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, उस समय सत्रावसान इससे भी अधिक समय तक नहीं किया गया था।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ के खिलाफ किसी प्रस्ताव आने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में प्रस्ताव लाने का नोटिस फिर से आता है तो निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के दो धड़ों के बीच चल रहे विवाद संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रक्रिया चल रही है। जवाब मांगा गया है और जवाब आने के बाद निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने संसद में सुनियोजित तरीके से कार्यवाही बाधित करने, नारेबाजी और तख्तियां दिखाने को अनुचित बताते हुए कहा है कि लोकतंत्र की मजबूती और घरेलू तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संसदों के बीच संवाद तथा विचार-विमर्श जरूरी है।उनका कहना था कि प्रत्येक देश की संप्रभुता का सम्मान करते हुए दुनिया की संसदों को आपस में संवाद करते रहना चाहिए ताकि सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकें और साझा चुनौतियों के समाधान के लिए संबंधित सरकारों को दिशा मिल सके।

लोकसभा अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में सभी देशों की सहमति से संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया जाएगा। ब्राजील में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद वहां संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया गया था। भारत भी साझा मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए भागीदार देशों के साथ संवाद करेगा।

श्री बिरला ने आतंकवाद को गंभीर वैश्विक चुनौती बताते हुए उम्मीद जताई कि सम्मेलन में इस मुद्दे पर विशेष रूप से चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संसदीय संवाद के माध्यम से साझा समस्याओं के समाधान तलाशे जा सकते हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत ने विभिन्न देशों के साथ संसदीय संबंध मजबूत करने के लिए संसदीय मैत्री समूहों के गठन की पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया है। सभी भागीदार देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह गठित किए गए हैं और इन द्विपक्षीय समूहों का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

रूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए श्री बिरला ने बताया कि उसके सदस्यों के साथ द्विपक्षीय बैठक के अलावा भारत-रूस संसदीय मैत्री समूह की बैठक भी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस का संसदीय अनुभव और अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों में उसकी भागीदारी दोनों देशों की संसदों के बीच सहयोग मजबूत करने में योगदान देगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने का नोटिस फिर से दिया जाता है, तो निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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