उच्चतम न्यायालय ने मोटर दुर्घटना अंतरिम राहत योजना को बताया ‘बिना घोषणा वाला कानून’

न्यायालय ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि सरकार ने इतनी महत्वपूर्ण जन-कल्याणकारी योजना को बिना किसी उचित प्रचार-प्रसार के लागू कर दिया और कहा कि मोटर दुर्घटना के पीड़ितों को तत्काल आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से बनाई गई यह कल्याणकारी योजना तब तक किसी काम की नहीं है, जब तक कि इसके हकदार लोगों को इसके बारे में पता ही न हो।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और के वी विश्वनाथन की पीठ ने योजना को चुपचाप लागू किए जाने पर असंतोष जताते हुए कहा, ” यह एक ऐसा कानून है, जिसकी कोई घोषणा नहीं की गई। लोगों को इसके बारे में पता होना चाहिए, क्योंकि यह एक लाभकारी कानून है। इस तरह तो आम आदमी को इसका पता ही नहीं चलेगा।”

न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करे, ताकि दुर्घटना के शिकार लोगों और उनके परिवारों को मिलने वाली राहत के बारे में पता चल सके।

गौरतलब है कि यह मामला एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उच्चतम न्यायालय के 28 अप्रैल, 2025 के उस निर्देश का पालन नहीं किया गया, जिसमें केंद्र से ‘मोटर वाहन अधिनियम’ की धारा 164ए के तहत एक वैधानिक तंत्र बनाने को कहा गया था, ताकि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को तुरंत अंतरिम मुआवजा मिल सके।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने पीठ को बताया कि सरकार ने ‘पीड़ितों के लिए मुआवजा (अंतरिम राहत) योजना, 2026’ तैयार कर ली है। उन्होंने योजना की धारा 6 का हवाला देते हुए कहा कि 23 फरवरी को ही सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर इन दिशा-निर्देशों का प्रचार-प्रसार करने के लिए कहा गया था।

इस जानकारी से हालांंकि खुद अदालत में मौजूद याचिकाकर्ता और ‘एमिकस क्यूरी’ (न्याय मित्र) दोनों हैरान रह गए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि यह योजना पहले ही अधिसूचित और प्रसारित की जा चुकी है। ‘एमिकस क्यूरी’ और याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि वर्तमान में यह योजना केवल उन मामलों को कवर करती है जिनमें वाहन का बीमा (इंश्योरेंस) है, जहां मुआवजा बीमा कंपनी द्वारा दिया जाता है, लेकिन इसमें उन दुर्घटनाओं के पीड़ितों को शामिल नहीं किया गया है। जिन मामलों में वाहन का बीमा नहीं है-ऐसे मामलों में जिम्मेदारी सीधे वाहन मालिक या चालक पर आ सकती है।

पीठ ने इन चिंताओं पर गौर करते हुए कहा कि कोई भी लाभकारी योजना केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके बारे में आम जनता को पता होना चाहिए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, ” हम चाहते हैं कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि आम लोगों को इस ‘मुआवजा योजना 2026’ के बारे में पता चले। लोगों को इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए क्योंकि यह एक अच्छा कानून है।”

पीठ ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि वह सुनवाई की अगली तारीख पर एक ठोस योजना पेश करे, जिसमें विस्तार से बताया गया हो कि इस योजना का पूरे देश में किस तरह प्रभावी ढंग से प्रचार-प्रसार किया जाएगा और इसे कैसे लागू किया जाएगा।

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