पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इसे ‘असंवैधानिक और एकतरफा कार्रवाई’ बताते हुए इसकी तीखी निंदा की है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार इमरान खान की रिहाई और उनके इलाज की मांग को लेकर समर्थकों को इस्लामाबाद की ओर मार्च करने से रोकना चाहती है।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी आपातकाल लागू करने और प्रांतीय सरकार को निलंबित करने के फैसले को अदालत में चुनौती देने पर विचार कर रही है। इसके लिए पेशावर उच्च न्यायालय और उच्च संवैधानिक मंचों सहित कानूनी विकल्पों को टटोला जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को आपातकाल की घोषणा के बाद से प्रांत में श्री खान की पार्टी पीटीआई के 270 से अधिक सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। गृह मंत्री तलाल चौधरी ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री सोहेल आफरीदी और उनके मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों को एहतियातन हिरासत में ले लिया गया है।
इस कदम से श्री खान का राजनीतिक गढ़ सीधे शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली संघीय सरकार के नियंत्रण में आ गया है, जिससे पीटीआई के साथ टकराव और बढ़ गया है। अक्टूबर की शुरुआत से ही खैबर पख्तूनख्वा में हजारों लोग इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर और अफगान सीमा पर सैन्य अभियानों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार बढ़ते उग्रवाद और आतंकवाद को रोकने में प्रांतीय प्रशासन की विफलता का हवाला दे रही है। मुख्यमंत्री अफरीदी खुद श्री खान के समर्थन में और सैन्य अभियानों के खिलाफ एक मार्च का नेतृत्व कर रहे थे।
श्री खान की रिहाई और इलाज की मांग को लेकर उनके समर्थकों के इस्लामाबाद के लिए तय किए गए मार्च से ठीक पहले यह आपातकाल लागू किया गया है। पीटीआई ने सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए आरोप लगाया है कि इसका मकसद विरोध प्रदर्शन को रोकना और उसके सबसे मजबूत प्रांत में पार्टी की पकड़ कमजोर करना है। पीटीआई नीत सरकार के निलंबन और उसके नेताओं की गिरफ्तारी ने श्री खान की पार्टी और पाकिस्तान के शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।
श्री चौधरी ने कहा कि जिन लोगों पर मामले दर्ज हैं, उन पर औपचारिक आरोप लगाकर मुकदमा चलाया जाएगा, जबकि बाकी लोगों को रिहा कर दिया जाएगा। श्री अफरीदी को पहले उनके आधिकारिक आवास पर ‘सुरक्षात्मक हिरासत’ में रखा गया था, जिसके बाद उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया गया है।
पीटीआई प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने प्रांतीय सरकार के निलंबन को ‘अप्रत्यक्ष तख्तापलट’ करार दिया और कहा कि इससे लोकतंत्र को और नुकसान पहुंचा है। खैबर पख्तूनख्वा में कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद आपातकाल की घोषणा की गई, जहां श्री खान के हजारों समर्थक राजधानी की ओर मार्च करने के लिए एकत्र हुए थे। अधिकारियों ने संभावित रैलियों को रोकने के लिए मुख्य रास्तों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए थे और शिपिंग कंटेनर लगा दिए थे।
पीटीआई ने हालांकि कहा है कि सरकार के साथ हुई बातचीत में श्री खान के अधिकारों जैसे उनकी रिहाई, इलाज की सुविधा और परिवार से मुलाकात पर कोई नतीजा नहीं निकला। 74 वर्षीय खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और भ्रष्टाचार तथा हिंसा भड़काने सहित कई आरोपों का सामना कर रहे हैं। वे और उनकी कानूनी टीम इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज करती रही है।
इन आपातकालीन उपायों के तहत प्रांतीय कार्यकारी शक्तियां केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपाल के पास चली गई हैं, जिससे खान की पार्टी उस इकलौते प्रांत से भी सत्ता से बाहर हो गई है जहां उसकी सरकार थी। सरकार ने कहा है कि सुरक्षा स्थिति में सुधार होने तक प्रांतीय प्रशासन का कामकाज ठप रहेगा।
