उज्जैन: सडक़ चौड़ीकरण के दौरान ऐसे अनेक परिवार सामने आए हैं, जिन्होंने अपने घरों के हिस्से हटाकर विकास कार्यों के लिए जगह उपलब्ध कराई। जिन लोगों ने हाथों से अपने आशियाने तोड़े उन्होंने विकास के तहत बड़ा दिल किया है, इधर जो बड़े व्यापारी है करोड़ों का टैक्स सरकार को दे रहे हैं उन्हें धंधा चौपट होने का डर सता रहा है। इनमें गरीब, मध्यमवर्गीय परिवार और छोटे दुकानदार भी शामिल हैं, जिनके लिए मकान या दुकान केवल संपत्ति नहीं, बल्कि जीवनभर की कमाई और परिवार के भरण-पोषण का साधन है। अब महाकाल मंदिर से लेकर गुदरी चौराहे और पटनी बाजार से लेकर गोपाल मंदिर तक के चौड़ीकरण में बड़े व्यापारियों को डर सता रहा है।
इन क्षेत्रों का व्यापार केवल स्थानीय नागरिकों तक सीमित नहीं है। महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु भी इन बाजारों तक पहुंचते हैं। धार्मिक पर्यटन बढऩे के साथ इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में सडक़ चौड़ीकरण को केवल वर्तमान की परेशानी के रूप में देखने के बजाय भविष्य की आवश्यकताओं से जोडक़र भी विचार किया जाना चाहिए। बेहतर सडक़ें, आवागमन की सुविधा और श्रद्धालुओं के लिए सुगम रास्ते लंबे समय में व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ पहुंचा सकते हैं। सडक़ें चौड़ी होंगी तो भीड़ के आवागमन, आपातकालीन सेवाओं और धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसके साथ पार्किंग, पैदल यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
पूरे शहर ने किया त्याग बड़े व्यापारी डर रहे
जब सीमित संसाधनों वाले परिवार व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर त्याग कर सकते हैं, तो बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों के संचालकों से भी अपेक्षा की जा सकती है कि वे शहर के भविष्य को ध्यान में रखकर प्रशासन के साथ संवाद करें और विकास कार्यों में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं। पटनी बाजार, महाकाल मार्ग, गुदरी बाजार और गोपाल मंदिर क्षेत्र उज्जैन के प्रमुख व्यापारिक एवं धार्मिक क्षेत्र हैं। यहां अनेक व्यापारियों ने वर्षों की मेहनत से अपना व्यवसाय स्थापित किया है और अच्छी आर्थिक स्थिति हासिल की है।
