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शाजापुर, मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा शाजापुर जिले के चिन्हित क्षेत्रों में 9 से 31 अक्टूबर तक कृष्णमृग एवं नीलगाय के रेस्क्यू एवं ट्रांसलोकेशन का अभियान संचालित किया जा रहा है. अभियान के दौरान प्रशिक्षित वन अमला, पशु चिकित्सा एवं विशेषज्ञ दल तथा आवश्यकतानुसार हेलीकॉप्टर एवं अन्य संसाधनों का उपयोग किया जाएगा. अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित रूप से निर्धारित क्षेत्रों में स्थानांतरित करना है. इस दौरान वन्यजीवों एवं ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी.
कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना ने जिले के ग्रामीणों से अपील की है कि अभियान के दौरान वन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें. ऑपरेशन की सूचना वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें तथा अभियान समाप्त होने की सूचना मिलने तक खेतों में कृषि कार्य, सिंचाई एवं अन्य गतिविधियां न करें. बच्चों को खेतों, सडक़ों, बोमा स्थल एवं वन्यजीवों की संभावित आवाजाही वाले क्षेत्रों से दूर रखें. पालतू पशुओं को खुले में न छोड़ें तथा वन्यजीवों को देखने के लिए भीड़ एकत्रित न करें. उन्होंने ग्रामीणों से कहा है कि वन्यजीवों का पीछा न करें. उन्हें घेरने, रास्ता रोकने अथवा भगाने का प्रयास न करें. हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर बाहर न निकलें तथा निर्धारित सुरक्षा क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश न करें. ग्रामीण अभियान के दौरान वन विभाग, पुलिस, ग्राम पंचायत एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन कर अभियान को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने में सहयोग करें.
अभियान के दौरान घबराएं नहीं
अभियान के दौरान वन विभाग की टीम, वाहन, पशु चिकित्सा दल एवं हेलीकॉप्टर की गतिविधियां दिखाई दे सकती हैं. ग्रामीण घबराएं नहीं और मौके पर भीड़ एकत्रित न करें. वन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा की गई सुरक्षा व्यवस्था का पालन करें तथा वन विभाग, पुलिस, ग्राम पंचायत एवं स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पूर्णत: अनुपालन करें.
ग्रामीणों से विशेष अपील
रेस्क्यू एवं ट्रांसलोकेशन अभियान की नोडल अधिकारी व मुख्य वन संरक्षक डॉ. किरण बिसेन द्वारा ग्रामीणों से अपील की गई है कि अभियान के दौरान विशेष सावधानी बरतें और वन्यजीवों को बिना किसी बाधा के गुजरने दें. कैप्चर टीम को सुरक्षित रूप से कार्य करने दें. ग्रामीणों का सहयोग अभियान को सुरक्षित, व्यवस्थित एवं वन्यजीव हितैषी बनाने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है. अभियान नोडल अधिकारी डॉ. बिसेन ने बताया कि उक्त अभियान की निगरानी प्रदेश स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी की जा रही है. जिसमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभीरक्षक डॉ. समिता राजौरा, अपर प्रधान मुख्य वन समकक्ष वन्य जीव एल कृष्णमूर्ति सहित 07 वनमंडलाधिकारी शामिल हैं.
