
मुंबई, 09 अक्टूबर (वार्ता)मराठी ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर नई कोर्टरूम ड्रामा सीरीज ‘कोण यशवंत पानसरे?’ का प्रीमियर 16 अक्टूबर 2026 को होगा। आनंद दिलीप गोखले के लेखन और निर्देशन तथा मंजिरी सुभाष भावे के निर्माण में बनी यह सीरीज न्याय, सत्ता और सच्चाई के बीच संघर्ष की कहानी पेश करेगी। इसमें अभिनेता भरत जाधव और पुष्कर श्रोत्री के बीच अदालत में जोरदार टकराव देखने को मिलेगा।तमिल सीरीज ‘सत्तमुम नीधियम’ से रूपांतरित इस खोजपरक रोमांचक कहानी में भरत जाधव यशवंत पानसरे और पुष्कर श्रोत्री सरकारी वकील सारडा की भूमिका में नजर आएंगे। शिवानी रांगोले जान्हवी के किरदार में दिखाई देंगी। इनके अलावा शर्वरी जामेनिस, उज्ज्वला जोग, विद्याधर जोशी और मिलिंद पाठक भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
सीरीज की कहानी कभी प्रभावशाली वकील रहे यशवंत पानसरे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक बड़ी पेशेवर असफलता के बाद नोटरी का काम करने तक सीमित रह जाते हैं। उनकी जिंदगी उस समय बदल जाती है, जब अपनी लापता बेटी अलका के मामले में न्याय नहीं मिलने से निराश एक बुजुर्ग पिता सदाशिव मापारी अदालत के बाहर आत्मदाह कर लेते हैं। इस घटना से विचलित पानसरे दोबारा वकालत की राह पर लौटते हैं और मामले में जनहित याचिका दायर करते हैं। इस संघर्ष में युवा वकील जान्हवी भी उनका साथ देती हैं।
शुरुआत में लापता लड़की की तलाश से जुड़ा यह मामला धीरे-धीरे पुलिस रिकॉर्ड, छिपाए गए साक्ष्यों, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवालों और राजनीतिक हितों के जाल में उलझ जाता है। मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई तक पहुंचता है, जहां पानसरे को सरकारी वकील सारडा सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जांच के दौरान सामने आने वाले खुलासे मामले की दिशा बदलते हैं और व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े करते हैं।
भरत जाधव ने कहा कि यशवंत पानसरे का किरदार उन्हें इसलिए आकर्षित करता है, क्योंकि वह असफलता, अपराधबोध और आत्म-संदेह से जूझने के बाद दोबारा न्याय की लड़ाई लड़ने का फैसला करता है। उनके अनुसार, पानसरे अचानक नायक नहीं बनता, बल्कि परिस्थितियां उसे अपनी आवाज वापस पाने और प्रायश्चित की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
पुष्कर श्रोत्री ने कहा कि सारडा का किरदार केवल अदालत में पानसरे का विरोध करने वाले वकील तक सीमित नहीं है। वह व्यवस्था और उसकी कार्यप्रणाली को समझता है। दोनों के बीच कानूनी बहस कानून, न्याय और व्यवस्था को लेकर अलग-अलग नजरियों को सामने लाती है।
शिवानी रांगोले ने कहा कि जान्हवी एक निडर युवा वकील है, जो पुरानी परंपराओं और स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाने से नहीं डरती। यशवंत पानसरे के साथ उसका जुड़ाव कहानी को नई दिशा देता है और दोनों अपने-अपने तरीके से व्यवस्था को चुनौती देते हैं।
लेखक-निर्देशक आनंद दिलीप गोखले ने कहा कि यह सीरीज ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो किसी मामले को केवल इसलिए बंद मानने से इनकार कर देता है, क्योंकि व्यवस्था ने जवाब तलाशना छोड़ दिया है। अदालत और जांच के साथ पानसरे की व्यक्तिगत यात्रा भी कहानी का अहम हिस्सा है।
