ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना अवैधानिक: हाईकोर्ट 

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) 27 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने को असंवैधानिक माना है। युगलपीठ ने सरकार के निर्णय को निरस्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है। इसके अलावा जातिगत आधार पर आरक्षण का निर्धारण नहीं किया जा सकता है।

प्रदेश सरकार के द्वारा ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किये जाने के संबंध में पारित अध्यादेश के पक्ष तथा विपक्ष में लगभग एक सैकड़ा याचिका दायर की गईं थीं। अध्यादेश के खिलाफ दायर की गईं याचिका में सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ द्वारा पारित इंदिरा साहनी तथा मराठा आरक्षण के संबंध में पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इसके अलावा यह भी तर्क दिया गया था कि जनसंख्या के आधार पर आरक्षण दिये जाने का प्रावधान नहीं है।

सरकार तथा अध्यादेश के पक्ष में दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि ओबीसी की संख्या प्रदेश में 51 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा ओबीसी वर्ग की आर्थिक स्थित का डाटा भी पेश किया गया था। युगलपीठ ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद 5 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किये थे। युगलपीठ ने 159 पेज के आदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किये जाने को अवैधानिक माना है। आरक्षण के खिलाफ दायर की गयी मुख्य याचिका की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने की।

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