ग्वालियर चंबल डायरी
ग्वालियर के बाशिंदे अपनी दुनिया या कामों में इतना मगन हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि कब कोई आया और कब विदा हो गया। जेड प्लस सिक्युरिटी हासिल अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर तीस लोगों के डेलिगेशन के साथ ग्वालियर आए और दो रोज तक चुपचाप ग्वालियर घूमघाम कर वापस चले भी गए, पुलिस और प्रशासन के चुनिन्दा बड़े साहबान को छोड़कर बाकी शहर को खबर ही नहीं हुई। वर्ल्डपावर को भारत में रिप्रजेंट करने वाले सर्जियो गोर ग्वालियर के किले पर भी गए और जयविलास महल भी, लेकिन शहर-ए-आम से दूरी बनाए रखी।
हां, शहर की विरासत और इतिहास के बारे में तफसील से जानकारी जरूर ली। इसके लिए आईआईटीटीएम से खास तौर पर सबसे जहीन गाइड को बुलाया गया था। सर्जियो गोर अपने डेलिगेशन के साथ मानसिंह पैलेस और लाइट एंड साउंड शो वाले क्षेत्र में भी देखे गए। मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के मद्देनजर अमेरिकी राजदूत जहाँ भी गए, वहां उनकी सिक्यूरिटी के लिए खुफिया एजेंसियों ने चुपचाप इंतजाम किए हुए थे। जयविलास पैलेस में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था होने के कारण इसे लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के पास कुछ फोन पहुंचने की भी खबर है। सर्जियो ग्वालियर से रुखसत हुए तो शायरा परवीन शाकिर की मशहूर ग़ज़ल की ये लाइनें याद आईं…”मुझे ख़बर न हुई, वो शख़्स आ के मिरे शहर से चला भी गया।”
मोतीमहल को अब जख्म नहीं देगी बेनूरी
“कभी मेरे आंगन में भी चमन बरसता था, चहचहाती थीं चिड़ियाँ, न जाने किसी शय्याद की नजर लगी…!” करीब सवासौ बरस पुरानी मोतीमहल की आलीशान इमारत को अब अपनी बेनूरी का दर्द नहीं सताएगा। वजह यह कि, यहां इंटरनेशनल पैमाने का “म्यूजियम ऑफ म्यूजिक” खोलने की सारी तैयारी मुकम्मल कर ली गई है। म्यूजियम के लिए तकनीकी टेंडर प्रक्रियाधीन हैं। पहले यह म्यूजियम मोतीमहल की अन्नपूर्णा इमारत में खुलने जा रहा था। रकम से लेकर टेंडर तक सब मंजूर हो चुके थे लेकिन इस इमारत में स्मार्ट सिटी ने कंट्रोल कमांड सेंटर खोल लिया।
म्यूजियम का काम देर तलक रुका रहा, अब फिर से पर्यटन निगम एक्शन मोड में है। बीस करोड़ मंजूर हो चुके हैं। यह इमारत सवासौ साल से सत्ता का केंद्र रही है। रियासत के दौर में यहां सचिवालय था। आजादी के बाद मध्यभारत की राजधानी ग्वालियर बना तो यहां विधानसभा लगने लगी। सीएम यहीं बैठते थे। 56 के बाद से कमिश्नरी समेत दर्जनों महकमों के दफ्तर यहीं आ गए। कुछ बरस पहले कमिश्नरी और दीगर दफ्तर यहां से दूसरी नई इमारतों में शिफ्ट हो गए। तब से सैकड़ों कमरों वाली ये इमारत सूनी है। जाहिर है कि “म्यूजियम ऑफ म्यूजिक” खुलेगा तो इमारत का नूर लौटेगा।
दिल्ली में अनेक, ग्वालियर में एक है इंडिया गठबंधन
दिल्ली में इंडिया गठबंधन भले ही बिखरी-बिखरी सी हालत में हो लेकिन अपने ग्वालियर में तो एकजुट नज़र आ रहा है। आज ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शहर में हो रहे इंडिया गठबंधन के मार्च की तैयारी के लिए यहां कांग्रेस दफ्तर पर इंडिया गठबंधन के घटकों की बैठक बुलाई गई तो माकपा, भाकपा, सपा, माले और आप जैसी तमाम पार्टियां शरीक हुईं। खास बात यह कि इनमें से कुछ पार्टियों ने इंडिया गठबंधन की हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में हिस्सेदारी नहीं की थी। जब ऐसी पार्टियों के नेताओं से इस दोहरे रवैये पर सवाल किया गया तो जवाब मिला कि नेतृत्व ने कोई बंदिश नहीं लगाई है, कुछ फैसले स्थानीय स्तर पर भी लिए जाते हैं, बैठक में इसलिए तशरीफ लाए क्योंकि मामला ज्ञानेश कुमार की विदाई तय करने का है। बहरहाल, आज गुरुवार का दिन ग्वालियर के लिए गर्म रहने वाला है। इंडिया गठबंधन अचलेश्वर मंदिर से गांधी स्मारक तक मार्च निकालने जा रहा है। बाकी पार्टियों की भागीदारी अपनी जगह, लेकिन भीड़ जुटाने की असल चुनौती तो कांग्रेस के ही कंधों पर रहेगी।
अस्पताल से लौटते ही काम में जुट गए एनर्जी मिनिस्टर
“फुर्सत ही कहाँ है कि मैं हालात पे रोऊँ, इतना मुझे मसरूफ़ ज़माने ने किया है।” सूबे के एनर्जी मिनिस्टर और ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र के नुमाइंदे प्रद्युम्न सिंह तोमर पर ये लाइन सटीक बैठती है। वे बीमार पड़े और दो महीने तक दिल्ली के अस्पताल में भर्ती रहे। अब दुरुस्त होकर अपने शहर लौट आए हैं। जिस रोज शहर आए, उसी दिन जनसुनवाई और फिर पार्टी के मंडल अध्यक्षों की मीटिंग। देर रात तक मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा। पहले की ही तरह अब यह रोज का सिलसिला बन गया है। डॉक्टरों ने आराम करने, मास्क लगाने, भीड़ से डिस्टेंस बनाकर चलने की ताईद की है लेकिन वे अपने स्वभाव से मजबूर हैं। फिलहाल उन्होंने अपना ध्यान निकाय चुनाव पर लगा दिया है। इसके बाद खुद को भी विधानसभा लड़ना है। उनके लंबे वक्त तक शहर से बाहर रहने के कारण जो समर्थक मायूस थे, वे भी अब काम में जुट गए हैं।
