नई दिल्ली, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के सैटेलाइट इंटरनेट प्रोजेक्ट ‘स्टारलिंक’ को भारत में लाइसेंस मिलने में हो रही देरी को लेकर छिड़ा विवाद गहराता जा रहा है। एलन मस्क द्वारा यह सवाल उठाए जाने के बाद कि क्या भारतीय नीतियां और उद्योगपति मुकेश अंबानी देश के तकनीकी नियम तय करते हैं, केरल भाजपा अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस पर बेहद तीखा और विस्तृत जवाब दिया है। चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर स्पष्ट किया कि भारत का दूरसंचार और तकनीकी क्षेत्र अब पूरी तरह से पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही के तीन मुख्य सिद्धांतों यानी ‘ओपन, सेफ एंड ट्रस्टेड तथा अकाउंटेबल’ (OSTA) पर संचालित होता है, न कि किसी कॉरपोरेट दबाव के तहत।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का टेक सेक्टर भ्रष्टाचार से मुक्त, राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता को दी जा रही है सर्वोच्च प्राथमिकता
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारत का टेलीकॉम सेक्टर अतीत में अपारदर्शिता और राजनीतिक पक्षपात से घिरा रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में व्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि आज देश की तकनीकी नीति का आधार यह है कि किसी एक कंपनी या सीमित समूह का बाजार पर एकाधिकार न हो और सभी को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिले। एलन मस्क की तकनीक की प्रशंसा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि स्टारलिंक एक प्रभावशाली तकनीक है, लेकिन भारत जैसे देश को, जिसने दशकों से सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया है, किसी भी नई सेवा को हरी झंडी देने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा और सैटेलाइट संचार से जुड़े पहलुओं की गहन जांच करना बेहद आवश्यक है।
सभी सैटेलाइट सेवा प्रदाता समान चरण में, सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद ही आगे बढ़ेगी स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया
राजीव चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि 26/11 मुंबई हमलों जैसी त्रासदियों और एन्क्रिप्टेड संचार से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए सरकार पहले सभी सेवा प्रदाताओं की सुरक्षा और विश्वसनीयता की जांच कर रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्तमान में सभी सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्रदाता लगभग एक ही चरण में हैं और लाइसेंस प्रक्रिया में सुरक्षा मंजूरी को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी जा रही है। सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद ही स्पेक्ट्रम आवंटन और कमर्शियल लॉन्च की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। भारत सरकार की यह स्पष्ट नीति है कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता किए बिना तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया जाए।

