दक्षिण कोरिया ने पहले हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल का किया परीक्षण

सोल, 08 अक्टूबर (वार्ता) दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि देश ने गुरुवार को अपने पहले हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (एचजीवी) का सफल परीक्षण किया।

राष्ट्रपति ली जे-म्यंग ने इस परीक्षण को देखा। यह लंबी दूरी तक हमला करने की नयी क्षमता हासिल करने की दिशा में एक कदम है।

राष्ट्रपति की प्रवक्ता कांग यू-जुंग ने मीडिया को दी गयी लिखित जानकारी में बताया कि इस प्रणाली के पहले परीक्षण को अभी भी विकसित किया जा रहा है, हाइपरसोनिक तकनीक की मुख्य खूबियों जैसे कि उड़ान का रास्ता और गति को जांचने के लिए किया गया था।

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने एचजीवी को एक ‘गेम-चेंजिंग रणनीतिक संपत्ति’ बताया, जो दुश्मन के ठिकानों पर अचानक एवं सटीक हमला करने में सक्षम है।

सुश्री कांग ने कहा, ” एचजीवी अपने बूस्टर से सफलतापूर्वक अलग हो गया और हाइपरसोनिक स्थितियों में अपने तय उड़ान पथ पर आसानी से आगे बढ़ा। यह सफल परीक्षण एक अहम पड़ाव है, क्योंकि कोरियाई प्रायद्वीप के इलाके में अहम ठिकानों पर हमला करने में सक्षम एक नया निवारक हथियार हासिल करने की तैयारियां पूरी हो गयी हैं।”

एचजीवी एक मिसाइल प्रणाली है, जो बूस्टर का इस्तेमाल करके तेज़ी से ऊपर के वायुमंडल में पहुंचता है, फिर बूस्टर से अलग होकर कम ऊंचाई पर हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ता है। परीक्षण स्थल पर रक्षामंत्री कांग शिन-चुल और रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन के प्रमुख श्री ली योंग-चियोल उनके साथ थे।

सुश्री कांग ने बताया कि इस परीक्षण के दौरान बहुत ज़्यादा तापमान सहने वाले थर्मल प्रोटेक्शन मटीरियल, गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम और कम ऊंचाई पर टेढ़े-मेढ़े रास्ते पर चलने की क्षमता का भी परीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के उलट, एचजीवी अलग होने के बाद कम ऊंचाई पर आया, उसने क्षैतिज और लंबवत दिशा में बदलाव किए और अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाया।

परीक्षण देखने के बाद, श्री ली ने देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डेवलपमेंट टीम की तारीफ़ की और इस बात पर ज़ोर दिया कि देश की सुरक्षा उसकी अपनी ताक़त से ही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सुश्री कांग के अनुसार, श्री ली ने कहा कि सरकार अत्याधुनिक हथियारों के विकास और उन्हें अभियान में लाने में पूरा सहयोग देगी, ताकि हमारे लोग बिना किसी चिंता के रह सकें।

श्री ली ने कहा, ” हमें आज की सफलता पर ही नहीं रुकना चाहिए, बल्कि इस तकनीक को और बेहतर बनाना चाहिए ताकि एचजीवी एक भरोसेमंद रणनीतिक संपत्ति बन सके जो भविष्य में हमारी सुरक्षा की रक्षा करे।”

यह भी खबर है कि श्री ली ने सेना की ह्यूनमू-5 सतह-से-सतह मिसाइल का भी निरीक्षण किया, जिसे इसके भारी पेलोड और विनाशकारी शक्ति के कारण ‘मॉन्स्टर मिसाइल’ उपनाम दिया गया है।

 

 

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