अक्रा (घाना), भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के तीन अफ्रीकी देशों के दौरे के पहले चरण के तहत घाना पहुंचने पर एक बड़ा कूटनैतिक विकास सामने आया है। घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुदजेटो अबलाकवा ने बुधवार को संयुक्त प्रेस वार्ता में घोषणा की कि उनके देश के मंत्रिमंडल ने ब्रिक्स (BRICS) का सदस्य बनने के प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इसके तहत घाना अब इस वैश्विक समूह में शामिल होने के लिए औपचारिक आवेदन करेगा और मौजूदा ब्रिक्स सदस्यों का समर्थन हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। घाना का मानना है कि इस समूह का हिस्सा बनने से देश की अर्थव्यवस्था को बदलने, रोजगार सृजन करने, औद्योगीकरण को बढ़ावा देने और संसाधन संप्रभुता के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की घाना की आकांक्षा की सराहना, कृषि और जैव-विविधता पर हुए महत्वपूर्ण समझौते
अपनी अफ्रीकी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घाना के नेतृत्व के साथ व्यापक बैठकें कीं, जिसमें राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से मुलाकात भी शामिल है। इस दौरान भारत और घाना के बीच कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण और जैव-विविधता जैसे अहम क्षेत्रों में द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली घाना की ब्रिक्स में शामिल होने की आकांक्षा के प्रति बेहद सहानुभूतिपूर्ण और सहयोगी रहा है। उन्होंने जोर दिया कि भारत और अफ्रीका दीर्घकालिक साझेदार हैं और आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन तथा ‘ग्लोबल साउथ’ में आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए।
पारंपरिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में कदम, अफ्रीका के साथ पीढ़ियों के लिए बनेगी साझेदारी
घाना के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका देश भारत, ब्राजील और चीन जैसे अपने पुराने और भरोसेमंद साझेदारों के साथ व्यापारिक तथा निवेश संबंधों को और अधिक मजबूत करना चाहता है। घाना के अनुसार, ब्रिक्स सदस्यता मिलने से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आर्थिक नीतियों को नए आयाम देने के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घाना के विदेश सेवा संस्थान में अपने संबोधन में कहा कि अफ्रीका उनके दिल में बसता है और भारत ऐसी स्थायी साझेदारी का निर्माण कर रहा है जो न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होगी।

