एनजीटी ने ऊना में कथित अवैध स्टोन क्रशर से संबंधित याचिका का निपटारा किया

नयी दिल्ली/शिमला, 27 अक्टूबर (वार्ता) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की यहां स्थित मुख्य पीठ ने हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की घनारी तहसील के मंदवाड़ा गाँव में एक अवैध स्टोन क्रशर इकाई के संचालन संबंधी याचिका का निपटारा कर दिया है।

पीठ ने पाया कि इकाई ने सभी अनिवार्य पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ प्राप्त कर ली थीं।

न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और डॉ. ए. सेंथिल वेल (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने देवी लाल बनाम पवन कुमार एवं अन्य मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

यह मामला स्टोन क्रशर स्थापित करने के लिए आवश्यक अनुमति के बिना भूमि समतलीकरण और पेड़ों की कटाई के आरोपों से संबंधित था। न्यायाधिकरण ने 2 जुलाई, 2025 को हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) को शिकायत की जाँच करने, स्थल निरीक्षण करने और यह सत्यापित करने का निर्देश दिया था कि क्या परियोजना प्रस्तावक ने आवश्यक मंज़ूरियाँ प्राप्त की हैं या नहीं।

इसके अनुपालन में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 11 अगस्त और 14 अगस्त, 2025 को निरीक्षण किए। बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौज़ा मारवाड़ी के मोहाल मंडवारा में स्थित इकाई के पास जल एवं वायु अधिनियमों के तहत वैध स्थापना सहमति (सीटीई) और संचालन सहमति (सीटीओ) थी। पेड़ों की कोई अवैध कटाई नहीं देखी गयी और उस स्थान पर झाड़ियाँ और बाँस जैसी कुछ प्राकृतिक वनस्पतियाँ मौजूद थीं। निरीक्षण में भारी वर्षा के कारण पक्की सड़क और तेज हवाओं से दीवार में मामूली क्षति भी देखी गई। मरम्मत के लिए मौके पर निर्देश जारी किए गए ,जिन्हें बाद के दौरे के दौरान पूरा पाया गया।

न्यायाधिकरण ने यह निष्कर्ष निकाला कि अवैध संचालन और पेड़ों की कटाई के आरोप निराधार थे और स्टोन क्रशर पर्यावरणीय मानदंडों का पूरी तरह अनुपालन कर रहा था। एनजीटी ने मामले का निपटारा करते हुए हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय नियमों के निरंतर अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए इकाई की नियमित निगरानी करने और किसी भी तरह के उल्लंघन की रिपोर्ट करने का निर्देश दिया।

 

 

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