
रीवा, रीवा के संजय गांधी अस्पताल से जुड़े चर्चित कल्पना मिश्रा मौत मामले में एक और बड़ी कार्रवाई हुई है। गायनी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. गुंजन गोस्वामी को निलंबित कर दिया गया है। यह आदेश डीन श्याम शाह मेडिकल कॉलेज द्वारा डिप्टी सीएम के निर्देश पर बुधवार को जारी किया गया है। उन्हें कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में ही निलंबित किया गया है।आपको बता दें कि हटवा निवासी कल्पना मिश्रा पति अमित मिश्रा की डिलेवरी के बाद 26 अगस्त को निधन हो गया था। कल्पना की मौत के बाद हंगामा मच गया था। कल्पना के एक वीडियो ने पूरे देश और प्रदेश का ध्यान रीवा के संजय गांधी अस्पताल की तरफ खींचा था। कल्पना के पिता सिरमौर चौराहा पर धरना पर बैठ गए थे। करीब 14 दिनों तक सिरमौर चौराहा पर प्रदर्शन चला था। इस दौरान कल्पना के पिता को मनाने की कई बार कोशिश की गई लेकिन वह कार्रवाई पर अड़े थे। उनकी मांग एफआईआर की थी। हालांकि कईयों को निलंबित करने के साथ ही डीन, अधीक्षक तक को हटाने की कार्रवाई की गई। भले ही मामला एक महीने से भी पुराना हो गया हो लेकिन कार्रवाई अभी रुकी नहीं है। कुछ दिन पहले ही डिप्टी सीएम ने डॉ. गुंजन गोस्वामी के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
*अब तक कईयों पर गिर चुकी है गाज*
कि कल्पना की मौत के बाद परिजन धरना पर बैठ गए थे। नर्सों पर अक्षमता का आरोप लगाया गया था। परिजनों का गुस्सा शांत करने के लिए अधीक्षक ने दो नर्सों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद भी जब मामला नहीं सुलझा तो दो डॉक्टरों को निलंबित किया गया। इसमें डॉ. सोनल अग्रवाल शामिल थीं। फिर भी हंगामा मचा रहा तो अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को हटाया गया। इसके बाद सिरमौर चौराहा का धरना उठा, हालांकि तो अंततः डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को हटाया गया। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर भोपाल से ड्रग नियंत्रक ने पत्र लिखकर रीवा के ड्रग इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया और अर्थटन ब्लड बैंक के खिलाफ एफआईआर कराने के निर्देश सीएमएचओ को दिए। इतनी कार्रवाई के बाद अब डॉ. गुंजन गोस्वामी पर भी गाज गिर गई है।
*इसलिए डॉ. गुंजन गोस्वामी पर गिरी गाज*
आपको बता दें कि डॉ. गुंजन गोस्वामी को ही कल्पना की हालत बिगड़ने का मुख्य जिम्मेदार माना गया। कल्पना का ट्रीटमेंट उन्हीं के पास चल रहा था। लगातार परिजन जांच भी करा रहे थे। प्लेटलेट्स कम था फिर भी उन्हें अस्पताल में भर्ती करने में देरी की गई। इसके अलावा भी कल्पना को कई दिक्कतें थीं। उसे भी नजर अंदाज किया गया। डिलेवरी की डेट भी ओवर हो गई थी। इसके बाद भी भर्ती नहीं किया गया था। इसी मामले में डॉ. गुंजन गोस्वामी पर गाज गिरी है। भोपाल से आई टीम ने इनका भी बयान लिया था।
*शिशु रोग मेडिसिन और एनेस्थीसिया के डॉक्टरों पर कब होगी कार्रवाई*
कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के लिए सिर्फ गायनी विभाग के ही चिकित्सकों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। इससे डॉ. सोनल अग्रवाल को निलंबित किया गया। अब डॉ. गुंजन गोस्वामी पर गाज गिरी। इसके अलावा शिशु की मौत के मामले में पीडियाट्रिक के डॉक्टरों को बचाया जा रहा है। डॉ. गौरव त्रिपाठी और डॉ. द्विवेदी की छुट्टी पर थे। वह नहीं थे। वह छुट्टी पर होते तो बच्चे की जान बच जाती। इसी तरह कल्पना की मौत के लिए एनेस्थीसिया के डॉक्टर निधि ने मेडिसिन के चिकित्सक से परामर्श के लिए लिखा था। बीपी ज्यादा था। उस दिन मेडिसिन विभाग में डॉ. राकेश पटेल और केशव सिंह की छुट्टी लगी थी लेकिन वह नहीं थे। पीजी के छात्र को भेजा गया था। इसी तरह एनेस्थीसिया में फर्स्ट कॉल निधि का था। वह न्यूरो में ऑपरेशन करा रही थीं। सेकेंड कॉल कुलदीप पटेल का था। उन्होंने फोन नहीं उठाया था। इन पर भी कार्रवाई नहीं हुई है।
