केन्द्र ने संबद्ध स्वास्थ्य देखभाल महाविद्यालयों के लिए निरीक्षण और सार्वजनिक रेटिंग व्यवस्था शुरू की

नयी दिल्ली, 07 अक्टूबर (वार्ता) केन्द्र सरकार ने संबद्ध स्वास्थ्य देखभाल पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों के लिए औपचारिक निरीक्षण और सार्वजनिक रेटिंग व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों के नियामकीय मूल्यांकन में छात्रों की प्रतिक्रिया, शोध प्रदर्शन, शिक्षण के मानक और परिसर की सुविधाओं को भी शामिल किया जाएगा। आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग (एनसीएएचपी) ने केंद्र सरकार के पूर्व अनुमोदन से स्वायत्त बोर्ड और केंद्रीय मूल्यांकन समिति (स्थापना, गठन, कार्य और शक्तियां) विनियम, 2026 को अधिसूचित किया है।

गत 28 सितंबर की तिथि वाली यह अधिसूचना भारत के राजपत्र के छह अक्टूबर के अंक में प्रकाशित की गई थी। ये विनियम आधिकारिक राजपत्र में अपने प्रकाशन की तिथि से लागू हो गए हैं। यह ढांचा स्वास्थ्य सेवा एवं संबंधित क्षेत्र के संस्थानों के सत्यापन, निरीक्षण और रेटिंग के लिए नियामक संरचना का निर्माण करता है और राज्य परिषदों के तहत काम करने वाले स्वायत्त बोर्डों की संरचना और शक्तियों को स्पष्ट करता है। एक मुख्य प्रावधान के तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों के मूल्यांकन और रेटिंग को संबंधित राज्य परिषद की वेबसाइट या सार्वजनिक पटल पर उपलब्ध कराना आवश्यक है। मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड मान्यता की मांग करने वाले आवेदनों का मूल्यांकन करेगा, निर्धारित न्यूनतम मानकों के अनुपालन का सत्यापन करेगा, अनुमति पत्रों के आवेदनों की जांच करेगा और मान्यता प्राप्त संस्थानों का निरीक्षण करेगा।

यह कमियों की पहचान करने के लिए वार्षिक विवरण रिपोर्टों की समीक्षा भी करेगा और राज्य परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। बोर्ड या उसकी ओर से सूचीबद्ध किए गए मूल्यांकनकर्ता, स्वास्थ्य सेवा एवं संबंधित पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति मांगने वाले संस्थानों सहित मान्यता प्राप्त संस्थानों का मूल्यांकन और रेटिंग करेंगे। ये नियम मौके पर जाकर किए जाने वाले निरीक्षण के लिए एक सुव्यवस्थित प्रणाली तय करते हैं।

राज्य परिषद की पूर्व अनुमति से संबंधित स्वायत्त बोर्ड तीन सदस्यीय निरीक्षण टीम गठित करेगा, जिसमें कम से कम एक सदस्य संबंधित स्वायत्त बोर्ड का होगा और दो नामांकित मूल्यांकनकर्ता होंगे, जिन्हें संस्थान के पाठ्यक्रमों की प्रकृति के अनुसार चुना जाएगा। राज्य परिषदों को निरीक्षण टीमों के आवंटन के लिए एक डिजिटल प्रक्रिया विकसित करने का भी अधिकार मिला है। निरीक्षण टीमों को न्यूनतम मानकों के अनुपालन का सत्यापन करना होगा, निरीक्षणों और की गई कार्रवाई के रिकॉर्ड का रख-रखाव करना होगा, सहायक साक्ष्य जुटाने होंगे और आयोग या राज्य परिषद को संस्थान सत्यापन रिपोर्ट सौंपनी होगी।

निरीक्षण और सत्यापन रिपोर्ट के दौरान जुटाई गई जानकारी आमतौर पर गोपनीय रहेगी, जब तक कि विनियमों के तहत खुलासा आवश्यक न हो या आयोग या राज्य परिषद की ओर से निर्देश न दिया जाए। जहां हितों का टकराव मौजूद होगा, वहां कोई निरीक्षण आयोजित नहीं किया जा सकता है। इस व्यवस्था में केवल बुनियादी ढांचे और न्यूनतम मानकों के अनुपालन तक ही सीमित नहीं रहा गया है, बल्कि मान्यता प्राप्त संस्थानों की निरंतर निगरानी का भी प्रावधान किया गया है। रेटिंग में निर्धारित मानकों के अनुपालन, नवीन शिक्षण पद्धतियों से प्रदर्शित शैक्षणिक उत्कृष्टता, छात्रों को प्रदान किए जाने वाले अतिरिक्त पाठ्यक्रमों, शोध उत्पादकता और उसके प्रभाव, छात्र अनुशासन और शिक्षण-अधिगम माहौल की गुणवत्ता पर विचार किया जाएगा।

महत्वपूर्ण रूप से, किसी संस्थान के विभिन्न पहलुओं पर छात्रों की प्रतिक्रिया को भी रेटिंग प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा और उसे उचित महत्व दिया जाएगा। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक, खेल और सामाजिक गतिविधियों में छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी, साथ ही खेल और सामाजिक सुविधाओं की उपलब्धता भी किसी संस्थान के मूल्यांकन में गिनी जाएगी।

स्नातक बोर्ड को एनसीएएचपी के निर्देशों के अनुसार, राज्यों में मान्यता प्राप्त स्नातक संबंधी और स्वास्थ्य सेवा पाठ्यक्रमों के लिए मानकों का निर्धारण और कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है। यह संकाय विकास और प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान करेगा, शोध को बढ़ावा देगा और स्नातक कार्यक्रमों के मूल्यांकन के लिए आयोग से अनुमोदित योग्यता-आधारित ढांचे को लागू करेगा। यही प्रावधान, आवश्यक संशोधनों के साथ, मान्यता प्राप्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए स्नातकोत्तर बोर्ड पर लागू होंगे। राज्य परिषद द्वारा गठित प्रत्येक स्वायत्त बोर्ड में एक अध्यक्ष सहित कम से कम 10 और अधिकतम 20 सदस्य होंगे, जिसमें स्वास्थ्य सेवा एवं उससे संबंधित व्यवसायों की प्रत्येक मान्यता प्राप्त श्रेणी से एक से दो सदस्य शामिल होंगे।

अध्यक्ष के पास किसी मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा एवं उससे संबंधित व्यवसाय में स्नातकोत्तर डिग्री होनी चाहिए और स्वास्थ्य सेवा एवं उससे संबंधित विज्ञान क्षेत्र में कम से कम 15 वर्षों का अनुभव होना चाहिए, जिसमें कम से कम सात वर्ष नेतृत्व की भूमिका में शामिल हों। सदस्यों के लिए कम से कम 10 वर्षों का अनुभव आवश्यक है, जिसमें पांच वर्ष नेतृत्व की भूमिका के होने चाहिए। अध्यक्ष और सदस्यों का राज्य या केंद्रीय रजिस्टर में पंजीकृत स्वास्थ्य सेवा एवं उससे संबंधित पेशेवर होना अनिवार्य है तथा उन्हें अपनी परिसंपत्तियों, देनदारियों और हितों के टकराव की घोषणा करनी होगी। वे दो वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगे और लगातार दो कार्यकालों के लिए पुनर्नियुक्त हो सकते हैं, लेकिन 70 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद पद पर नहीं बने रह सकते।

नैतिकता और पंजीकरण बोर्ड स्वास्थ्य सेवा एवं उससे संबंधित पेशेवरों का राज्य रजिस्टर बनाए रखेगा और आचार संहिता और पेशेवर आचरण के निर्धारित मानकों के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा। यह पंजीकृत पेशेवरों के पेशेवर आचरण और नैतिकता के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों या मामलों की जांच करेगा और राज्य रजिस्टर से उनका नाम हटाने की सिफारिश कर सकता है। विनियम उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक अलग व्यवस्था प्रदान करते हैं, जहां एक कार्यात्मक राज्य परिषद स्थापित नहीं की गई है। ऐसे क्षेत्रों में, एक केंद्रीय मूल्यांकन समिति एनसीएएचपी की समग्र देखरेख में काम करेगी और आयोग का सचिवालय उसकी सहायता करेगा।

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