
नीमच। बिजली के खंभे पर काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारी की मौत के बाद नीमच में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए। मृतक प्रताप सिंह पिता भंवर सिंह, निवासी अमावली के शव को लेकर परिजन और ग्रामीण एमपीईबी कार्यालय पहुंचे और कार्यालय के बाहर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिवार को मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी।
पोल पर काम कर रहा था, अचानक बिजली चालू होने का आरोप
परिजनों के अनुसार हादसा बिसलवास कलां में हुआ। प्रताप सिंह बिजली के पोल पर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक बिजली सप्लाई चालू होने की बात सामने आई, जिसके बाद वे पोल से नीचे गिर गए। हादसे में उनकी मौत हो गई।
परिजनों ने घटना को लेकर बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों से बिजली के खंभों पर काम कराया जाता है। ऐसे में काम के दौरान लाइन पूरी तरह बंद है या नहीं, इसकी पुष्टि और मौके पर जिम्मेदार अधिकारी या सुपरवाइजर की मौजूदगी बेहद जरूरी है।
हालांकि घटना के समय बिजली सप्लाई किस प्रक्रिया के तहत बंद और चालू हुई, लाइन पर किस अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी थी और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। मामले में विभाग का विस्तृत पक्ष सामने आना भी बाकी है।
10 साल काम किया, फिर भी स्थायी नहीं हुआ
प्रदर्शनकारियों के अनुसार प्रताप सिंह करीब 10 वर्षों से बिजली विभाग में आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में काम कर रहे थे। परिवार का कहना है कि लंबे समय तक विभाग के लिए सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का लाभ नहीं मिला।
अब उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसी को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने के साथ एक परिजन को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने से बढ़ा आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान नरेंद्र सिंह शक्तावत ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद विभाग के डीई और सुपरवाइजर स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचकर परिजनों से बातचीत करने के लिए तैयार नहीं थे। इससे परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया और वे शव लेकर बिजली विभाग के कार्यालय पहुंच गए।
जांच में सामने आएगा हादसे का जिम्मेदार कौन
मामले में अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि पोल पर कर्मचारी के काम करने के दौरान बिजली सप्लाई किस तरह बहाल हुई। क्या लाइन बंद होने की पुष्टि के बाद कर्मचारी को पोल पर भेजा गया था? बिजली चालू करने की अनुमति किस स्तर से मिली? मौके पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं?
इन सभी बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण है। फिलहाल परिजन मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग पर अड़े हैं। बिजली विभाग कार्यालय के बाहर शव रखकर प्रदर्शन और चक्काजाम के चलते माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
