शारदीय नवरात्रि के लिए सज-धजकर तैयार हो रहीं मां दुर्गा की प्रतिमाएं, दिया जा रहा अंतिम स्वरूप

सतना:शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व को लेकर जिलेभर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। मां दुर्गा की अगवानी में अब महज चार दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस बार जिले में करीब 1000 से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी है। मूर्तिकारों द्वारा प्रतिमाओं के श्रृंगार और फिनिशिंग का काम अंतिम दौर में है।

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक मूर्तिकारों द्वारा इस वर्ष 2 फीट से लेकर 12 फीट तक की आकर्षक प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। प्रतिमाओं का मुख्य निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब रंग-रोगन, नयन निर्माण, श्रृंगार और अन्य फिनिशिंग का काम चल रहा है। मां दुर्गा के अलावा महाकाली सहित विभिन्न स्वरूपों की प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं।

भक्तों की भेंट की साड़ियों से हो रहा श्रृंगार

इस बार प्रतिमाओं के श्रृंगार में आस्था का विशेष रंग देखने को मिल रहा है। कई मूर्तियों में मिट्टी या प्लास्टर से साड़ी की आकृति बनाने के बजाय श्रद्धालुओं द्वारा भेंट की गई नई साड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पूजा समितियों और श्रद्धालुओं द्वारा मूर्तिकारों को साड़ियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिन्हें प्रतिमाओं पर विधिवत पहनाकर आकर्षक श्रृंगार किया जा रहा है।

3 हजार से 20 हजार रुपये तक कीमत

मूर्तियों के आकार और कारीगरी के आधार पर उनकी कीमत करीब 3 हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक रखी गई है। बढ़ती निर्माण लागत के बावजूद मूर्तिकारों द्वारा अलग-अलग बजट के अनुसार प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। कई समितियों ने प्रतिमाओं की बुकिंग पहले ही करा ली है और अब उन्हें पंडालों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है।

प्रतिमाओं में दिख रही कारीगरी की बारीकी

मूर्तिकारों की महीन कारीगरी से मां दुर्गा की प्रतिमाओं के मुखमंडल को विशेष रूप से आकर्षक रूप दिया गया है। आंखों की बनावट, आभूषण, वस्त्र और शारीरिक हाव-भाव प्रतिमाओं को जीवंत स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। नवरात्रि शुरू होने से पहले ही मूर्तिकारों के यहां तैयार प्रतिमाएं श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। अब नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही जिलेभर में मां दुर्गा के जयकारों से माहौल भक्तिमय होने की तैयारी है।

मूर्तिकार प्रभात ने बताया कि वे मूर्ति निर्माण के लिए कलकत्ता से सतना आते हैं और पिछले चार वर्षों से यहां प्रतिमाएं तैयार करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश रहती है कि प्रत्येक प्रतिमा को आकर्षक और जीवंत स्वरूप दिया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को मां के दर्शन का विशेष अनुभव हो। एक प्रतिमा को तैयार करने में 4 से 5 कारीगर मिलकर काम करते हैं और निर्माण से लेकर रंग-रोगन व श्रृंगार तक हर चरण में बारीकी का विशेष ध्यान रखा जाता है।

मूर्तिकार चेतन केवट ने बताया कि वे सतना के ही निवासी हैं। पहले वे गांवों में मूर्ति निर्माण का काम करते थे, लेकिन इस वर्ष उन्होंने शहर में प्रतिमाएं तैयार करने का काम शुरू किया है। वे मुख्य रूप से मूर्तियों को सजाने और उन्हें आकर्षक रूप देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिमा निर्माण केवल मेहनत का काम नहीं, बल्कि इसमें कला, रचनात्मकता और बारीकी की भी आवश्यकता होती है।

मूर्तिकार पलास पाल ने बताया कि उनके यहां 3 फीट से लेकर 12 फीट तक की मां दुर्गा की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। श्रद्धालुओं की मांग के अनुसार माता के अलग-अलग स्वरूपों में प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रतिमाओं में आर्टिफिशियल साड़ी के बजाय कई भक्त अपनी पसंद की नई साड़ी अलग से उपलब्ध कराते हैं, जिसे मूर्तिकारों द्वारा प्रतिमा पर विधिवत और आकर्षक तरीके से पहनाया जाता है। उनका कहना है कि मूर्ति निर्माण के जरिए उनका प्रयास रहता है कि श्रद्धालुओं को मां के भव्य और मनमोहक स्वरूप के दर्शन का अनुभव हो सके।

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