
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार का नया बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 बिजनेस जेट कनाडा से भारत पहुंचने की प्रक्रिया में है, लेकिन इसके आने के साथ ही वीआईपी यात्राओं के लिए इसका तत्काल संचालन शुरू नहीं हो सकेगा। विमान को कस्टम क्लीयरेंस, डीजीसीए पंजीयन, एयरवर्थिनेस प्रमाणन और अन्य परिचालन मंजूरियों की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
राज्य सरकार ने मई 2021 में ग्वालियर में बीक्राफ्ट किंग एयर बी200जीटी की क्रैश लैंडिंग के बाद नया विमान खरीदने का फैसला किया था। करीब 65 करोड़ रुपये में खरीदा गया यह विमान बीमित नहीं था और अब इसे 7 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य पर बेचने की तैयारी है। इसके बाद मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य वीआईपी यात्राओं के लिए सरकार को किराये के विमान पर निर्भर रहना पड़ा।
विधानसभा में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच विमान और हेलीकॉप्टर किराये पर करीब 290 करोड़ रुपये खर्च हुए। यह खर्च 2019 में 1.63 करोड़ रुपये से बढ़कर नवंबर 2025 तक 90 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
चैलेंजर 3500 की शुरुआती कीमत करीब 233 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि टैक्स, परिवहन और अन्य खर्चों सहित मौजूदा अनुमान करीब 350 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके अलावा राज्य ने एयरबस एसीएच160 हेलीकॉप्टर भी खरीदा है।
हालांकि, विमान का स्वामित्व अपने आप में तत्काल बचत की गारंटी नहीं देता। अनुमानित वार्षिक संचालन लागत 18 से 33 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। करीब 450 उड़ान घंटे के उपयोग पर प्रति घंटे लागत मौजूदा चार्टर दरों से भी अधिक होने का अनुमान है।
विमान के संचालन के लिए आधारभूत ढांचे की भी जरूरत होगी। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल करीब 10 हवाई अड्डे और हवाई पट्टियां ही इसे संभालने में सक्षम हैं। 18–20 हवाई पट्टियों के विस्तार पर 300–400 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। ऐसे में जेट, हेलीकॉप्टर और हवाई पट्टी विस्तार सहित कुल खर्च 875–975 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिसमें हेलीपैड की लागत शामिल नहीं है।
