करोड़ों का बजट, दिखाए कई सपने, लेकिन हकीकत में काम अधूरे.

इंदौर: शहर में नगर निगम द्वारा बजट में सड़क, ड्रेनेज, नर्मदा लाइन का काम के लिए करोड़ों रुपए का प्रावधान कर दिया जाता हैं, लेकिन एक साल में उतना काम होता नहीं है. तीन या पांच साल में भी काम पूरे नहीं होते हैं. उदाहरण के लिए नेहरू स्टेडियम को तोड़कर आधुनिक स्टेडियम बनाने के लिए करीब 450 करोड़ रुपए की घोषणा की गई थी, लेकिन राशि के अभाव में काम ही शुरू नहीं हुआ.

नर्मदा अमृत 1.0 योजना में 27 टंकी और ड्रेनेज के लिए 980 करोड़ का बजट किया गया. स्थिति यह है कि कई टंकियों का काम अभी भी अधूरा है या फिर बन गई है, तो उनकी जल वितरण लाइन नहीं डाली है या टैस्टिंग नहीं हुआ है. अमृत 2.0 योजना में 32 करोड़ रुपए से 1600 किलोमीटर नर्मदा लाइन ओर 40 टंकियों का निर्माण होगा. उक्त योजना में 2029 तक काम पूरा करने की समय सीमा है. नगर निगम ने अमृत 2.0 के लिए 1360 करोड़ का लोन लिया है, ताकि कम में पैसो को लेकर रुकावट नहीं हो. सड़कों और पुल पुलियाओं के लिए 1 हजार करोड़ से ज्यादा का प्रावधान है. ड्रेनेज लाइन के लिए 5 सौ करोड़ और कान्ह सरस्वती नदी में नाला टैपिंग पर 3 हजार करोड़ खर्च करने के बाद इस साल फिर 450 करोड़ का आवंटन किया है. ध्यान देने वाली बात यह है कि नगर निगम के बजट में सबसे बड़ी राशि कर्मचारियों के वेतन में जाती है. दूसरा आर्थिक मजबूती को लेकर निगम पिछले कई सालों से परेशान है. आज की स्थिति में निगम को ठेकेदारों का 750 करोड़ रुपए देना है.

चार सालों बन रही 23 सड़कें
मास्टर प्लान की सभी 23 सड़कें पिछले चार सालों से बन रही है, लेकिन एक भी पूरी नहीं हुई, पूरे शहर में अधूरी सड़क का जाल बना हुआ है. यही स्थिति गंदे की पानी की समस्या को लेकर है. कहने का मतलब यह है कि हर मद में करोड़ों की राशि का प्रावधान सिर्फ दिखावे के लिए होता है, लेकिन काम करने के लिए वास्तविकता में राशि नहीं होती है.

150 में से 40 ही लेफ्ट टर्न हुए चौड़े
शहर में यातायात के लिए 150 स्थानों पर सड़क के लेफ्ट टर्न चौड़े करने थे, अभी तक 40 ही हुए हैं. यातायात में जागरूकता के लिए तीन माह में 1 हजार ट्रैफिक मित्र बनाने और उनको पिक अवर में यातायात संभालने की योजना बनाई गई थी. आज दो साल में भी कोई ट्रैफिक मित्र यातायात संभालते नजर नहीं आता है.

1050 करोड़ का राजस्व मिला
निगम को सभी करों से इस साल 1050 करोड़ का राजस्व मिला है. इसके पहले यह राशि बहुत कम होती थी, लेकिन पिछले तीन चार सालों में 700 सौ करोड़ से 1 हजार करोड़ का आंकड़ा पार किया है. केंद्र और राज्य सरकार का हिस्सा योजनाओं के अनुरूप आता है. कहने का तात्पर्य यह है कि नगर निगम को हर साल सिर्फ 25 सौ से 3 हजार करोड़ आय है और बजट 8 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बनता है. वास्तविक आय और बजट राशि में भारी अंतर विकास की प्राथमिकता और समस्या समाधान का बेमेल गठबंधन बन रहा है. ना विकास समय पर और ना समस्या का निराकरण.

  नगर निगम ने ये सराहनीय काम किए…

– ग्रीन बॉन्ड से जलूद में 60 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाया. 30 करोड़ से ज्यादा बिज़ली बिल बच रहा है.
– 10 वार्डो में डिजिटल पता बना दिए.
– एक लाख से ज्यादा निगम दस्तावेजों की फ़ाइल डिजिटलाइजेशन काम चल रहा है.
– निगम के सभी टैक्स से राजस्व आय 1 हजार करोड़ पार की.
– पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले साल 51 लाख और इस साल 21 लाख पौधे लगाए जा रहे हैं.
– शहर के सभी 85 वार्डों में संजीवनी क्लीनिक का निर्माण पूरा, 75 वार्डो में स्वास्थ सेवाएं शुरू.
– जल संरक्षण के लिए रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अभियान चलाया जा रहा है.
– बायो गैस प्लांट में 500 से 850 टन कचरे निपटान क्षमता की.
– अमृत योजना 2.0 नर्मदा चौथा चरण की नींव रखी और 450 एमएलडी पानी एवं 16 सौ एमएलडी जलूद में और बिजलपुर में पश्चिम क्षेत्र की टंकियों के लिए नए सम्पवेल का निर्माण कार्य चल रहा है.
– अमृत-2.0 योजना में निगम सीमा में आए 29 गांव सहित शहर की कुछ कॉलोनियों में ड्रेनेज लाइन डालने का काम शुरू करवाया.
– नदी शुद्धिकरण अभियान में कान्ह-सरस्वती नदी के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का काम लक्ष्मीबाई प्रतिमा, कबीटखेड़ी, कनाडिया, टिगरिया बादशाह और धनखेड़ी में निर्माण कार्य है.
– शहर में मास्टर प्लान की 23 सड़कों में से 18 का काम चल रहा है.
– वक्फ बोर्ड से धोबी घाट की जमीन निगम को दिलवाई और करीब 125 एकड़ से ज्यादा का लैंड बैंक बनाया.
– चिड़ियाघर में 14डी थिएटर, वर्चुअल जंगल सफारी बनाई गई.
– महू में नई आधुनिक गौशाला, जिसमें 10 हजार गायों रखने की व्यवस्था का काम अंतिम चरण में है.

हर साल बजट में करोड़ों का प्रावधान, लेकिन समस्या का समाधान नहीं…

– शहर में गंदे पानी की समस्या का हल पिछले कई सालों से नहीं हुआ, भागीरथपुरा कांड हो गया.
– नेहरू स्टेडियम को तोड़कर आधुनिक स्टेडियम नहीं बना सके.
– जल जमाव से शहर की जनता आज भी परेशान.
– बीआरटीएस तोड़ा , लेकिन यातायात जाम की समस्या हल नहीं.
– नगर निगम मुख्यालय भवन आज भी अधूरा पड़ा है.
– निगम की आर्थिक स्थिति में बदलाव नहीं, आज भी ठेकेदारों का 750 करोड़ रुपए देना बकाया.
– मास्टर प्लान की सड़कों का काम आज भी अधूरा पड़ा है, एक सड़क का काम पूरा नहीं हो सका.
– 1500 करोड़ का ड्रेनेज सिस्टम का बजट, पर ना नाला नदी बना और नहीं ड्रेनेज की स्थिति सुधरी. नगर निगम के कई वार्ड में खुदाई से सड़कें खराब हो रही हैं, वो अलग खर्च बढ़ रहा.
– शहर में 1000 करोड़ से अमृत 1.0 योजना नर्मदा पानी टंकियों बनने और लाइन डालने का काम अधूरा और अमृत 2.0 योजना शुरू कर दी.
– हर साल 30 से 40 करोड़ रुपए पंचवर्क पर खर्चा, लेकिन खुदी सड़कें और गड्ढों का हल नहीं.
– यातायात जाम और पुल पुलिया के चौड़ीकरण के काम भी अधूरे हैं.
– 27 गांवों के लिए कोई जोनल प्लान नहीं बना सके.
– 550 से ज्यादा अवैध कॉलोनी आज भी नियमितीकरण के इंतजार में है.

फंड के अनुसार तय करते हैं प्राथमिकता

नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि बजट में निगम की आय के अनुसार विकास कार्य होते हैं. फंड के अनुसार प्राथमिकता तय करते हैं. केंद्र सरकार के फंड से जो कार्य किए जा रहे हैं, उनमें देरी के दूसरे कारण है. वहां फंड की दिक्कत नहीं आती है. बजट में सभी मदों से प्राप्त राशि के आधार पर प्रावधान करते है.

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