जबलपुर: बस का परमिट वैध हो या न हो, दुर्घटना के समय वाहन बीमित होने पर बीमा कंपनी दावेदारों के प्रति अपने वैधानिक दायित्व से मुक्त नहीं हो सकती। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को 2.90 लाख रुपये का मुआवजा छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया। दावेदारों की ओर से अधिवक्ता सुशील त्रिपाठी ने पैरवी की।
मामला बस की टक्कर से गुड्डू उर्फ उमेश यादव की मृत्यु से जुड़ा है। उमेश अपने बहनोई के साथ मोटर साइकिल से जा रहे थे। दुर्घटना में उमेश की मृत्यु हो गई, जबकि उनका बहनोई घायल हुआ। पुलिस ने बस चालक के विरुद्ध धारा 279 और 337, भारतीय दंड संहिता के तहत प्रकरण दर्ज किया था। मृतक के माता-पिता रूप नारायण यादव और जानकी बाई ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, जबलपुर में दावा प्रस्तुत किया।
अधिकरण ने 2.90 लाख रुपये का मुआवजा छह प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने हाई कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि दुर्घटना के समय बस का वैध परमिट नहीं था, इसलिए कंपनी भुगतान के लिए उत्तरदायी नहीं है। दावेदारों की ओर से अधिवक्ता सुशील त्रिपाठी ने तर्क दिया कि बस मप्र सड़क परिवहन निगम के साथ अनुबंधित थी और उसे अलग परमिट की आवश्यकता नहीं थी। बस बीमित भी थी। हाईकोर्ट ने तर्क स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी की आपत्ति खारिज कर दी और मुआवजा भुगतान का आदेश बरकरार रखा।
