नयी दिल्ली, 03 अक्टूबर (वार्ता) रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार को कहा कि दुनिया में अगले वित्तीय संकट का कारण गैर-वित्तीय भी हो सकता है। श्री मल्होत्रा ने यहां पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में “अनिश्चितता के युग में केंद्रीय बैंकों की भूमिका” विषय पर एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि कोई जरूरी नहीं है कि दुनिया में अगले वित्तीय संकट का कारण वित्तीय ही हो। इसलिए आज की आर्थिक मजबूती भविष्य में आर्थिक संकट से सुरक्षा की गारंटी नहीं है, और केंद्रीय बैंक के रूप में बदलती परिस्थितियों पर नजर रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा अगला वित्तीय संकट भू-राजनैतिक कारणों से हो सकता है, किसी बड़े साइबर हमले के कारण हो सकता है या फिर किसी तकनीकी खामी के कारण भी हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसका असर कितना व्यापक रहता है। श्री मल्होत्रा ने कहा कि भले ही वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना सीधे तौर पर रिजर्व बैंक की जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन परोक्ष रूप से यह उसके कार्य क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
वित्तीय स्थिरता के बिना मुद्रास्फीति में स्थिरता नहीं आ सकती। इसके बिना अर्थव्यवस्था में भी स्थिरता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत और पूरी दुनिया में लंबे समय तक रही वित्तीय स्थिरता के कारण ही पिछले कुछ समय में हम संकटों का समाना करने में सफल हुए हैं – चाहे वह कोरोना महामारी का संकट हो या भू-राजनैतिक संकट। उन्होंने कहा पश्चिम एशिया संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था भी अछूती नहीं रही है। इसका असर कीमतों पर पड़ा है। लेकिन अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत होने के कारण मुद्रास्फीति लक्षित दायरे के भीतर रही है और विकास दर मजबूत रही है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इस सदी के शुरुआती वर्षों में बैंकों द्वारा बिना सोचे-समझे दिए गए ऋण के बोझ के कुप्रभावों से उबरने में एक दशक का समय लग गया। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी भारत में केंद्रीय बैंक की प्रमुख जिम्मेदारी है और इसके लिए कभी-कभी मुद्रास्फीति बढ़ने को जोखिम भी उठाना पड़ता है।

