वाशिंगटन, दुनिया के प्रमुख विकसित लोकतांत्रिक देशों के समूह G7 (जी-7) ने आसमान छूती ईंधन की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जारी व्यवधानों से निपटने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। एक आपातकालीन बैठक के बाद G7 देशों ने अपने रणनीतिक आपातकालीन भंडारों से 100 मिलियन (10 करोड़) बैरल कच्चा तेल और डीजल चरणबद्ध तरीके से बाजार में जारी करने का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण पहल का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और यूरोपीय देशों में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी डीजल और कच्चे तेल की कीमतों को नीचे लाना और वैश्विक बाजार में ऊर्जा स्थिरता बहाल करना है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि इस पूरी योजना का समन्वय इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के हाथों में होगा।
ईंधन की सप्लाई तत्काल प्रभाव से होगी शुरू, सबसे पहले डीजल की किल्लत दूर करने पर रहेगा विशेष जोर
योजना के तहत ईंधन की यह सप्लाई तुरंत यानी तत्काल प्रभाव से शुरू की जा रही है, जिसमें सबसे ज्यादा किल्लत वाले ईंधन यानी डीजल पर विशेष फोकस रहेगा। पहले 20 दिनों के भीतर बाजार में डीजल की एक भारी खेप उतारी जाएगी ताकि उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिल सके, जबकि बाकी बची मात्रा को अगले चार महीनों में चरणबद्ध रूप से जारी किया जाएगा। यह फैसला अमेरिकी प्रशासन के भारी दबाव और चेतावनी के बाद आया है, जिसमें अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि यूरोपीय देशों द्वारा अतिरिक्त आपूर्ति न जारी करने पर निर्यात प्रतिबंध लग सकता है। हालांकि, नए समझौते के तहत सभी देश ऊर्जा प्रवाह को सुचारू रखने पर सहमत हुए हैं।
ईरान संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव के बीच लिया गया यह फैसला, विशेषज्ञों ने जताई बाजार में स्थिरता की उम्मीद
पिछले कई महीनों से जारी भू-राजनीतिक तनावों और रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों के बाद वैश्विक स्तर पर ईंधन का संकट गहरा गया था, जिसके कारण अमेरिका और यूरोप में कीमतें काफी बढ़ गई थीं। हालांकि इस कदम से तात्कालिक राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन कुछ ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन भंडारों को इस प्रकार खाली करने से भविष्य में अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। फिलहाल, इस ऐतिहासिक फैसले को आगामी सर्दियों के मौसम और वैश्विक महंगाई से जूझ रही आम जनता को राहत दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

