बिराती (पश्चिम बंगाल), उत्तर 24 परगना जिले के बिराती स्थित बानिक मोड़ पर एसएफआई की रीजनल कॉन्फ्रेंस के तहत आयोजित सीपीआई(एम) की एक सार्वजनिक सभा के दौरान शुक्रवार देर रात भारी उपद्रव और हिंसा देखने को मिली। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कुछ उपद्रवियों ने बैठक के मंच पर जमकर तोड़फोड़ की और ईंट-पत्थर बरसाए, जिसके चलते कई लेफ्ट कार्यकर्ता और समर्थक लहूलुहान हो गए। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सीपीआई(एम) केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजान चक्रवर्ती और युवा नेत्री दीपसिता धर सहित कई दिग्गज नेता मौजूद थे। हमले में सीपीएम नेता शिबशंकर घोष के सिर पर गंभीर चोट आई है जिन्हें पांच टांके लगे हैं, जबकि अन्य कई कार्यकर्ता भी घायल हुए हैं।
गांधी जयंती के दिन अनुमति प्राप्त कार्यक्रम में बाधा डालने का आरोप, महात्मा गांधी की तस्वीर पर अंडे फेंकने की बात आई सामने
घटना के बाद एसएफआई नेत्री दीपसिता धर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि यह सभा प्रशासन से पूरी अनुमति लेकर गांधी जयंती के मौके पर आयोजित की गई थी, लेकिन सोची-समझी रणनीति के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में व्यवधान डाला। उन्होंने दावा किया कि हमलावरों ने न केवल मंच और कुर्सियां तोड़ीं बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर पर भी अंडे फेंके। वामपंथी नेताओं का आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनकर सब देखती रही और हमलावर आसानी से वहां से फरार हो गए। इस घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए निमता पुलिस थाने से भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
भाजपा ने लेफ्ट के सभी आरोपों को किया सिरे से खारिज, कहा— ‘मंच से लगाए जा रहे थे देशविरोधी नारे’
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वाम दलों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने दावा किया है कि इस घटना से उनकी पार्टी का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा का कहना है कि सीपीएम की इस बैठक के मंच से कथित तौर पर देशविरोधी नारे लगाए जा रहे थे, जिससे आहत होकर स्थानीय नागरिकों और आम लोगों ने वहां पहुंचकर अपना विरोध जताया था। फिलहाल पुलिस ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया है और दोनों पक्षों के दावों की गहन जांच के साथ-साथ इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

