भारत के पास कोई ऐसी अतिशय विनिर्माण क्षमता नहीं कि जिससे दूसरे देशों को डंपिंग का खतरा हो: जी20 में पीयूष गोयल

नयी दिल्ली, 02 अक्टूबर (वार्ता) भारत ने कहा है कि उसकी अर्थव्यवस्था मुख्यत: घरेलू मांग पर आधारित है और उसके पास ऐसी कोई अतिशय विनिर्माण क्षमता नहीं है कि उससे दूसरे देशों में डंपिंग का खतरा हो।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के मिलवॉकी में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के समापन दिवस पर कहा कि औद्योगिक क्षमता अपने आप में मुद्दा नहीं है, जबकि विकृतियाँ तब उत्पन्न हो सकती हैं जब उत्पादन का भौगोलिक संकेंद्रण छिपी हुई सब्सिडी और समर्थन से प्रेरित हो। वाणिज्य मंत्री ने वैश्विक व्यापार विकृतियों को दूर करने के लिए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के अनुरूप दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि श्री गोयल ने कहा कि भारत कई सदस्य देशों की इस चिंता से सहमत है कि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार को विकृत करने वाली सब्सिडी डंपिंग और वैश्विक विनिर्माण श्रृंखला में अनुचित मूल्य निर्धारण की परिस्थितियों को जन्म दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी चिंताओं का समाधान डब्ल्यूटीओ के अनुरूप उपायों के माध्यम से किया जाता है, जिनमें साक्ष्य-आधारित और न्यायिक समीक्षा के अधीन डंपिंग रोधी और प्रतिपूर्ति शुल्क (काउंटरवेलिंग ड्यूटी) शामिल हैं। इस बैठक में भारत ने जबरन मजदूरी कराने की प्रथा को खत्म करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और साक्ष्य-आधारित व्यापार उपायों का आह्वान किया। जी20 के व्यापार मंत्रियों की मिलवॉकी बैठक के समापन दिवस की चर्चा में भाग लेते हुए श्री गोयल ने बुनियादी तौर पर खड़ी की गयी अतिशय विनिर्माण क्षमता और उत्पादन, सबसे पसंदीदा राष्ट्र सिद्धांत को अद्यतन करने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने और समापन सत्र पर अपने विचार व्यक्त किए।

बुनियादी तौर पर खड़ी की गयी अतिरिक्त विनिर्माण क्षमता और उत्पादन के मुद्दे पर वाणिज्य मंत्री श्री गोयल ने कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता उसकी घरेलू और वैश्विक जरूरतों को पूरा करती है और जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत के पास बुनियादी तौर पर जरूरत से ज्यादा विनिर्माण क्षमता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी घरेलू मांग पर आधारित अर्थव्यवस्था 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा करती है। भारत उत्पाद डिजाइन से लेकर तैयार माल तक विनिर्माण श्रृंखलाओं का निर्माण कर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि औद्योगिक क्षमता अपने आप में मुद्दा नहीं है, जबकि विकृतियाँ तब उत्पन्न हो सकती हैं जब उत्पादन का भौगोलिक संकेंद्रण छिपी हुई सब्सिडी और समर्थन से प्रेरित हो।

उन्होंने कहा कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण एक वैध उद्देश्य है, लेकिन इसका उपयोग डब्ल्यूटीओ नियमों से बाहर के उपायों के बहाने के रूप में या समायोजन का बोझ विकासशील देशों पर डालने के लिए नहीं किया जा सकता है, जिन्हें औद्योगीकरण के लिए नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सांख्यिकी और डेटा का आदान-प्रदान मौजूदा तंत्रों के भीतर होना चाहिए।

व्यापार में सबसे अधिक वरीयता वाले राष्ट्र (एमएफएन) के सिद्धांत को अद्यतन करने के विषय पर श्री गोयल ने कहा कि जी20 सदस्यों के साथ भारत का व्यापार एक पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली पर निर्भर करता है।एमएफएन का दर्जा इस प्रणाली की एक प्रमुख गारंटी है, जो यह सुनिश्चित करता है कि सबसे छोटे व्यापारी से लेकर सबसे बड़े व्यापारी तक सभी पर समान शर्तें लागू हों। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में आम सहमति सर्वोपरि है और विकासशील देशों को विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बराबर आने में सक्षम बनाने के लिए विशेष और भिन्न व्यवहार को बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने दो स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करने का भी आह्वान किया। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने के विषय पर श्री गोयल ने कहा कि जबरन श्रम के उन्मूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पूर्ण और बिना शर्त है। उन्होंने उल्लेख किया कि संविधान का अनुच्छेद 23 जबरन श्रम को एक मौलिक अधिकार के रूप में प्रतिबंधित करता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय संगठन संगठन के सम्मेलन 29 और 105 की पुष्टि की है और जुलाई 2026 में जबरन श्रम का उपयोग करके उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया है।

श्री गोयल ने कहा कि बाहर से आने वाले सामानों के बारे में उठाए जाने वाले कदम संपूर्ण देशों, क्षेत्रों या वर्गों के बारे में अनुमानों के बजाय विशिष्ट और सत्यापन योग्य साक्ष्यों पर आधारित होने चाहिए और इनमें उचित प्रक्रिया और डब्ल्यूटीओ के नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन श्रम मानकों के लिए सक्षम, सार्वभौमिक और त्रिपक्षीय निकाय है। भारत जी20 सदस्यों के बीच जबरन श्रम उन्मूलन और अच्छी प्रथाओं के स्वैच्छिक आदान-प्रदान के उद्देश्य का समर्थन करता है, बशर्ते कि इस तरह के सहयोग में सदस्यों की निगरानी शामिल न हो, नए दायित्व उत्पन्न न हों या किसी भी जानकारी का उपयोग एकतरफा व्यापार कार्रवाई के आधार के रूप में न किया जाए।

श्री गोयल ने मिलवॉकी में किए गए आयोजनों और आतिथ्य सत्कार के लिए राजदूत ग्रीर और संयुक्त राज्य अमेरिका की जी20 अध्यक्ष को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कथन का उल्लेख करते हुए कि जिन मुद्दों का समाधान मिलकर नहीं हो सकता, उन्हें उन मुद्दों के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए जिनका समाधान मिलकर हो सकता है, श्री गोयल ने कहा कि भारत ने इसी भावना के साथ बैठक में भाग लिया और चारों विषयों पर अपनी चिंताओं को साझा किया और रचनात्मक सुझाव दिए। बैठक के दौरान गोयल ने ऑस्ट्रेलिया के व्यापार और पर्यटन मंत्री, सऊदी अरब के वाणिज्य मंत्री, फ्रांस के विदेश व्यापार और आर्थिक आकर्षण के लिए प्रतिनिधि मंत्री, कोरिया और कनाडा के व्यापार मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं।

 

Next Post

फिल्म, क्रिकेट और OTT के RIGHTS का करोड़ों का खेल 

Fri Oct 2 , 2026
नई दिल्ली। क्रिकेट मैच हो या बॉलीवुड फिल्म, स्क्रीन पर दिखने वाले कंटेंट के पीछे करोड़ों रुपये का बड़ा कारोबार चलता है। Broadcast Rights, Digital Rights, OTT Rights, Satellite Rights और Music Rights के जरिए तय होता है कि किसी कंटेंट को कौन-सा प्लेटफॉर्म, कितने समय और किन शर्तों के […]

You May Like