नई दिल्ली, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (DA) के बकाए का भुगतान दो सप्ताह के भीतर करने को कहा गया था। राज्य सरकार का तर्क है कि इतने कम समय में 14,191 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का भुगतान करना संवैधानिक रूप से पूरी तरह असंभव है।
संवैधानिक प्रावधानों और विधायी प्रक्रिया का हवाला
वित्त विभाग के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 266(3) के अनुसार, विधायिका की पूर्व मंजूरी और एप्रोप्रिएशन एक्ट के बिना राज्य की संचित निधि से इतनी बड़ी राशि निकालना संभव नहीं है। इसके लिए निर्धारित संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, जिसे चौदह दिनों की अल्पावधि में पूरा नहीं किया जा सकता।
वित्तीय दबाव और हाईकोर्ट के निर्देशों पर आपत्ति
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने कर्मचारियों के अधिकारों के खिलाफ नहीं है, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा तय की गई समय-सीमा और केंद्रीय दरों पर भुगतान के निर्देश व्यावहारिक नहीं हैं। सरकार का सालाना वेतन और पेंशन बिल पहले ही काफी अधिक है, ऐसे में इस आदेश से राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर भारी संकट आ सकता है।

