नयी दिल्ली, 25 अप्रैल ( वार्ता) सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया है और पूर्व आर्थिक सलाहकार डॉ अशोक कुमार लाहिड़ी को सरकार के इस शीर्ष परामर्श संस्थान का उपाध्यक्ष बनाया है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी राजीव गौबा तथा प्रो. के.वी. राजू, प्रो. गोबर्धन दास, प्रो. अभय करंदीकर और डॉ. एम. श्रीनिवास को आयोग पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया है। डॉ. लाहिड़ी नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉक्टर सुमन बेरी का स्थान ले रहे हैं जो दो मई 2021 से इस पद पर थे। वह पश्चिम बंगाल विधानसभा में बालूरघाट निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने इस बार का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है। वह 15वें वित्त आयोग के सदस्य रहे हैं। प्रधानमंत्री पदेन इस निकाय के अध्यक्ष होते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्थान के पुनर्गठन पर नए उपाध्यक्ष और उनकी टीम को शुभकामनाएं दी हैं।
श्री मोदी ने सोशल मीडिया पर शनिवार को एक पोस्ट में कहा, “नीति आयोग भारत की नीति-निर्माण संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, जो सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने, सुधारों को आगे बढ़ाने और जीवन की सुगमता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। यह विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और दीर्घकालिक रणनीतिक सोच के लिए एक गतिशील मंच के रूप में कार्य करता है।” प्रधानमंत्री ने कहा, “सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया है। डॉ लाहिड़ी जी को उपाध्यक्ष बनने पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। साथ ही, श्री राजीव गौबा जी, प्रो. के.वी. राजू जी, प्रो. गोबरधन दास जी, प्रो. अभय करंदीकर जी और डॉ. एम. श्रीनिवास जी को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य बनने पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।इन सभी को उनके सफल और प्रभावशाली कार्यकाल की शुभकामनाएं।”
डॉ. लाहिड़ी नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉक्टर सुमन बेरी का स्थान ले रहे हैं जो 2 मई 2021 से इस पद पर थे। वह पश्चिम बंगाल विधानसभा में बालूरघाट निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने इस बार का विधान सभा चुनाव नहीं लड़ा है। वह 15 में वित्त आयोग के सदस्य हैं। डा लाहिड़ी वर्ष 2002-04 तक वाजपेई सरकार में और 2004-07 तक मनमोहन सरकार के दौर में मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। उन्होंने प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी कोलकाता से स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि और दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है जहां वह अध्यापन भी कर चुके हैं। उन्हें सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने का व्यापक अनुभव है और वह एशियाई विकास बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक में भी काम कर चुके हैं।

