मास्को, 02 अक्टूबर (स्पुतनिक/वार्ता) यूरोपीय संघ ने आपातकालीन योजनाएं बनानी शुरू कर दी है ताकि अगर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ इस्तीफ़ा दें या चुनाव के बुरे नतीजों और अपने गठबंधन में आपसी कलह के कारण अपना ध्यान घरेलू मामलों पर केंद्रित करें तो उनसे निपटा जा सके। यह जानकारी पश्चिमी मीडिया ने शुक्रवार को राजनयिकों एवं अधिकारियों के हवाले से दी। सूत्रों के अनुसार, दो यूरोपीय देशों की सरकारों ने इस बात का आकलन करने के लिए आंतरिक बैठकें भी की हैं कि चांसलर पद से श्री मर्ज़ के हटने का ईयू की नीति तय करने पर क्या असर पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईयू के लिए सबसे खराब स्थिति यह होगी कि जर्मनी बिना किसी नेता के रह जाए या वहां दक्षिणपंथी सरकार सत्ता में आ जाए; हालांकि, निकट भविष्य में इन दोनों ही स्थितियों की संभावना बहुत कम लग रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अगर चांसलर मर्ज़ को इस्तीफ़ा देना पड़ता है तो उनकी जगह तुरंत उनकी पार्टी, क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) या उनके गठबंधन सहयोगी, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ जर्मनी (एसपीडी) के किसी व्यक्ति को लाया जाएगा। इस संभावना से ईयू को भरोसा मिल रहा है कि जर्मनी बिना नेता के नहीं रहेगा।
इसके अलावा, सूत्रों का कहना है कि जर्मनी में अपनी कमज़ोर राजनीतिक स्थिति के कारण, श्री मर्ज़ ईयू के सात साल के बजट पर जर्मनी के रुख के लिए और भी ज़ोर दे सकते हैं जिससे समझौते तक पहुंचने की कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं। सितंबर के आखिर में, फाइनेंशियल टाइम्स अखबार ने खबर दी कि जर्मनी, नीदरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और फिनलैंड की सरकारों ने ईयू के नए लंबी-अवधि के बजट को लेकर एक अल्टीमेटम जारी किया है, जिसमें सैकड़ों अरब यूरो की कटौती की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि श्री मर्ज़ की लोकप्रियता तेज़ी से घट रही है, जिसका कारण उनके द्वारा अपनाई गई आर्थिक नीतियां हैं। उनकी सरकार सेना पर खर्च को प्राथमिकता देती है और यूरोप की सबसे ताकतवर सेना बनाने की योजना बना रही है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि जर्मनी की अमेरिकी सैन्य-औद्योगिक परिसर से स्वतंत्र सेना बनाने की कोशिश नाकाम हो जाएगी।

