नक्शे से जमीन तक पहुंचा पश्चिम भोपाल बायपास: 25 गांवों में भूमि अधिग्रहण तेज, 35.61 किमी फोरलेन कॉरिडोर का रास्ता साफ

भोपाल। पश्चिम भोपाल बायपास अब मास्टर प्लान के प्रस्ताव से आगे बढ़कर भूमि अधिग्रहण के चरण में पहुंच गया है। प्रशासन ने 25 गांवों में जमीन जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इनमें हुजूर तहसील के 16 और कोलार तहसील के 9 गांव शामिल हैं। सितंबर में अलग-अलग चरणों में अधिसूचनाएं जारी होने के बाद अब जमीन की पहचान, दावे-आपत्तियों और मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

हुजूर तहसील के 16 गांव: खोकरिया, सरवर, समसगढ़, समसपुरा, फंदा खुर्द, हटाईखेड़ी, पिपलिया धाकड़, नरेला, भानपुर केकड़िया, जाटखेड़ी, टीलाखेड़ी, फंदा कला, झागरिया खुर्द, आंवला, मूडला और दीपड़ी।

कोलार तहसील के 9 गांव: रतनपुर सड़क, गुराड़ी घाट, पिपलिया केशो, सेमरी कलां, पिपलिया बेरखेड़ी, बोरदा, थुआखेड़ा, महावड़िया और कालापानी।

मास्टर प्लान के अनुसार प्रस्तावित बायपास करीब 35.61 किलोमीटर लंबा और चार लेन का होगा। यह रतनपुर क्षेत्र के 11 मील जंक्शन से शुरू होकर कोलार और रातीबड़ होते हुए फंदा कलां के पास भोपाल-देवास मार्ग तक प्रस्तावित है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,774 करोड़ रुपए है।

सितंबर में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई कई चरणों में आगे बढ़ी। 18 सितंबर को 9 गांवों, 22 सितंबर को 5 गांवों और 29 सितंबर को थुआखेड़ा, रतनपुर सड़क व आंवला के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। धारा 21 की सूचनाओं के बाद संबंधित जमीन मालिकों और हितधारकों को दावे-आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।

अर्बन डेवलपमेंट रिसर्चर मनोज मीक के अनुसार, बायपास से जुड़ी अलग-अलग सड़क अवधारणाओं की स्पष्ट पहचान के साथ वास्तविक जंक्शन और प्रभाव क्षेत्र को GIS पर सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि सड़क विकास के साथ अनियोजित रिबन डेवलपमेंट न हो।

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