
इंदौर। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए न्यायिक जांच आयोग की सिफारिशों को तत्काल लागू करने की मांग की।
रेसीडेंसी में आयोजित पत्रकार वार्ता में सिंघार ने कहा कि इस घटना ने इंदौर में सुरक्षित पेयजल, नगर प्रशासन और नागरिकों के प्रति जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सेवानिवृत्त मध्यप्रदेश हाईकोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले न्यायिक जांच आयोग ने जल प्रदूषण, बीमारी एवं मौतों के साथ प्रशासनिक और तकनीकी खामियों की जांच की। करीब 600 पृष्ठों की रिपोर्ट हाईकोर्ट के निर्देश पर उसकी वेबसाइट पर अपलोड की गई है।
सिंघार ने कहा कि जांच में भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जा रहा पानी मानव उपयोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया तथा पेयजल पाइपलाइन में सीवेज का प्रवेश प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया। आयोग ने 36 मौतों की जांच की, जिनमें 22 को दूषित पानी से संबंधित बीमारियों से जुड़ा माना गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि लेआउट प्लान, ब्लूप्रिंट, डिजाइन ड्रॉइंग और पाइपलाइन अलाइनमेंट मैप जैसे महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग रिकॉर्ड आयोग के समक्ष उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए। उन्होंने पाइपलाइन बदलने के कार्य में देरी की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
सिंघार ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा और मरीजों को चिकित्सा सहायता देने की सिफारिशों पर सरकार से समय-सीमा स्पष्ट करने को कहा।
