सौसर : क्षेत्र के सायखेड़ा गांव में इस वर्ष ग्रामीणों को एक बार फिर भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। गांव की जीवनरेखा माने जाने वाले मुख्य तालाब से अवैध रूप से मोटरें लगाकर पानी की खुलेआम चोरी की जा रही है। लगातार हो रहे इस दोहन के विरोध में गुरुवार को ग्राम पंचायत ने मोर्चा खोलते हुए जल संसाधन विभाग को शिकायत पत्र सौंपकर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
एक दर्जन से अधिक पंप सक्रिय, रायसोनी प्रबंधन पर मनमानी का आरोप-
एसडीओ को सौंपे ज्ञापन में पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि तालाब किनारे एक दर्जन से अधिक अवैध विद्युत मोटर पंप स्थापित कर दिन-रात पानी खींचा जा रहा है। इसमें कुछ किसानों के अलावा प्रमुख रूप से रायसोनी यूनिवर्सिटी प्रबंधन शामिल है। पंचायत का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा भारी मात्रा में किए जा रहे जल दोहन के कारण जलस्तर तेजी से गिर रहा है। इस संबंध में प्रबंधन से पहले भी कई बार मोटरें हटाने का आग्रह किया गया, लेकिन उनकी हठधर्मिता बरकरार है।
कम बारिश से पहले ही कम था जल स्तर-
ग्रामीणों के अनुसार, इस मानसून सीजन में कम वर्षा होने के कारण तालाब में नया पानी जमा नहीं हो पाया है। वर्तमान में केवल पिछले वर्ष का संचित जल ही शेष है। जिस तेजी से अवैध मोटरें चलाई जा रही हैं, उससे आशंका है कि आगामी एक माह के भीतर तालाब पूरी तरह सूख जाएगा। यदि समय रहते निकासी नहीं रोकी गई, तो मवेशियों और ग्रामीणों के सामने पीने के पानी की विकराल समस्या खड़ी हो जाएगी।
अवैध मोटरें जब्त करने की मांग-
सरपंच संगीता दिलीप ठाकरे, उपसरपंच सुभाष परतेती एवं पंचायत सचिव ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब किनारे लगी सभी अवैध मोटरों को तत्काल जब्त कर पानी निकासी पर पूर्ण रोक लगाई जाए। साथ ही यूनिवर्सिटी प्रबंधन द्वारा किए जा रहे अनाधिकृत दोहन की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
बहरहाल इस मामले में रायसोनी यूनिवर्सिटी प्रबंधन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी
