सरकारी ड्यूटी के समय निजी अस्पतालों में सेवा, नीमच मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर उठे सवाल

नीमच। जिला चिकित्सालय एवं नीमच मेडिकल कॉलेज में पदस्थ कुछ चिकित्सकों के ड्यूटी समय में निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम में सेवाएं देने के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पिछले कुछ महीनों से कुछ चिकित्सक शासकीय ड्यूटी अथवा ओपीडी के निर्धारित समय के दौरान शहर के निजी चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को देखने और ऑपरेशन संबंधी सेवाएं देने पहुंच रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित चिकित्सकों का पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

मामले में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि जानकारी सामने आई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित चिकित्सक निजी संस्थानों में अपने निर्धारित शासकीय ड्यूटी समय के दौरान सेवाएं दे रहे हैं या उनके निजी कार्य का समय अलग है। प्रबंधन ने मामले की जानकारी लेकर नियमानुसार स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है।

तीन चिकित्सकों के नाम चर्चा में सूत्रों के अनुसार मेडिकल कॉलेज में पदस्थ , डॉ. हेमंत भारद्वाज और डॉ. कुणाल चौहान व जिला चिकित्सालय मे पदस्थ डॉ दिनेश पाटीदार के निजी चिकित्सा संस्थानों में सेवाएं देने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह सभी चिकित्सक निश्चेतना यानी एनेस्थीसिया से संबंधित सेवाएं देते हैं और निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के दौरान कई घंटे मौजूद रहते हैं।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किस चिकित्सक ने किस तारीख, किस समय और किस निजी संस्थान में शासकीय ड्यूटी के दौरान सेवा दी, इस संबंध में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट अथवा दस्तावेज अभी सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इन आरोपों को जांच का विषय माना जा रहा है।

सवाल ड्यूटी और मरीजों की उपलब्धता का मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई चिकित्सक शासकीय अस्पताल में निर्धारित ड्यूटी पर पदस्थ है, तो उसी अवधि में निजी संस्थान में उसकी मौजूदगी कैसे संभव हो रही है। खासकर जिला चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता मरीजों के उपचार के लिए महत्वपूर्ण होती है।

यदि किसी चिकित्सक की निजी गतिविधि के कारण शासकीय अस्पताल की ओपीडी, वार्ड, ऑपरेशन अथवा आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत होगी। वहीं यदि निजी सेवा निर्धारित शासकीय ड्यूटी के बाहर और लागू नियमों के अनुरूप है, तो स्थिति अलग होगी। इसी बिंदु को जांच में स्पष्ट किया जाना है।

डीन बोले—जानकारी मिली है, जांच के बाद स्थिति होगी स्पष्ट

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आदित्य बारोट के अनुसार उन्हें मामले की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित चिकित्सक निजी प्रैक्टिस के लिए किस समय जाते हैं और क्या उस दौरान उनकी शासकीय ड्यूटी निर्धारित है। उन्होंने मामले की जानकारी लेकर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही।

सिविल सर्जन भी लेंगे संबंधित डॉक्टरों से जानकारी

जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटील ने भी मामले की जानकारी संज्ञान में आने की बात कही है। उनका कहना है कि संबंधित चिकित्सकों से इस संबंध में जानकारी ली जाएगी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि कोई चिकित्सक शासकीय ड्यूटी के दौरान निजी संस्थान में सेवाएं दे रहा था और यह नियमों के विपरीत है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही शासकीय अस्पताल में मरीजों को निर्धारित चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा।

जांच में सामने आएगा आरोपों का सच

मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल चिकित्सा पेशेवरों के पंजीयन के साथ चिकित्सा आचार-संहिता और अच्छे चिकित्सा व्यवहार के मानकों के पालन की जिम्मेदारी भी बताती है तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान रखती है। ऐसे में मामले में वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक/उपस्थिति रिकॉर्ड, ओपीडी समय, अवकाश विवरण और संबंधित निजी संस्थानों में चिकित्सकों की उपस्थिति जैसे तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

अब निगाह इस बात पर है कि मेडिकल कॉलेज और जिला चिकित्सालय प्रबंधन की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय होगी, वहीं यदि चिकित्सकों की निजी सेवाएं निर्धारित ड्यूटी के बाहर और नियमों के अनुरूप पाई जाती हैं तो आरोपों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

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