नयी दिल्ली, 01 अक्टूबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संघ लोक सेवा आयोग के 100 वर्षों के समारोह को एक विरासत और युवाओं की आकांक्षा का उत्सव बताया और कहा कि लोक सेवाओं में आने वाले युवाओं के लिए देश और नागरिक पहली प्राथमिकता होना जरूरी है। श्री मोदी ने गुरुवार को यहां लोक सेवा आयोग के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हर वर्ष लाखों युवा नई आकांक्षाओं के साथ राष्ट्र सेवा के लिए आगे बढ़ते हैं। उन्होंने लोक सेवाओं में भर्ती के लिए दो कसौटियों-राष्ट्र प्रथम और नागरिक प्रथम-को याद रखने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोक सेवाओं में ऐसे युवा आने चाहिए, जो सार्वजनिक पद से नहीं, बल्कि जनसेवा से आकर्षित हों। उनके मुताबिक भर्ती परीक्षा में केवल यह नहीं परखा जाना चाहिए कि उम्मीदवार कितना जानता है, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि वह सिविल सेवाओं में क्यों आना चाहता है। उन्होंने कहा कि सरकार का मंत्र ‘नागरिक देवो भव’ है। इसका अर्थ है कि देश का नागरिक उनके लिए किसी देव से कम नहीं है और नागरिक की सेवा सर्वोपरि है। श्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत नई कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है। इसका मूल सिद्धांत लोगों के हित में काम करना, सक्रिय रहना और अच्छा शासन देना है।

